चंडीगढ़/यूटर्न/25 मार्च। चंडीगढ़ में सरकारी भर्तियों और आउटसोर्स नियुक्तियों की प्रक्रिया को लेकर मामला अब संसद तक पहुंच गया है। कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने लोकसभा में इस विषय को उठाते हुए भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की।
सांसद तिवारी ने श्रम एवं रोजगार मंत्रालय से सवाल किया कि पिछले पांच वर्षों और वर्तमान वर्ष के दौरान चंडीगढ़ रोजगार एक्सचेंज में कितने उम्मीदवार पंजीकृत हुए और उनमें से कितनों को विभिन्न सरकारी विभागों में नौकरी दी गई। उन्होंने यह भी जानना चाहा कि अस्थायी, कॉन्ट्रैक्ट और आउटसोर्स आधार पर भर्ती के लिए पंजीकृत उम्मीदवारों को किस प्रकार अवसर दिए जाते हैं।
उन्होंने विशेष रूप से यह मुद्दा उठाया कि क्या चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा ऐसा कोई नियम लागू किया गया है, जिसके तहत 20 से 25 प्रतिशत आउटसोर्स भर्तियां रोजगार एक्सचेंज के माध्यम से करना अनिवार्य हो।
इस पर केंद्रीय श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री Shobha Karandlaje ने जवाब देते हुए पिछले वर्षों के पंजीकृत उम्मीदवारों का डेटा प्रस्तुत किया। हालांकि आउटसोर्सिंग एजेंसियों की निगरानी और पारदर्शिता से जुड़े सवालों पर विस्तृत जानकारी नहीं दी गई।
मंत्री ने अपने जवाब में कहा कि संबंधित विभाग अनुबंध और तय दिशा-निर्देशों के अनुसार एजेंसियों के कामकाज की निगरानी करते हैं। लेकिन इस जवाब से भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर उठे सवाल पूरी तरह शांत नहीं हुए हैं।
इस मुद्दे के संसद में उठने के बाद अब चंडीगढ़ की भर्ती प्रक्रिया और आउटसोर्सिंग सिस्टम पर बहस तेज होने की संभावना है।