Uturn Time
Breaking
सुबह-सुबह 8 से 10 गाड़ियों में पहुंची सेंट्रल जीएसटी की टीमें, सुधीर फोर्जिंग में दस्तावेजों की जांच शुरू Chandigarh: हरियाणा में आयुष सेवाओं को मिलेगा विस्तार, हिसार आयुष अस्पताल अगस्त 2026 तक होगा शुरू Shimla: हिमाचल कैबिनेट का बड़ा फैसला, 5,600 से अधिक पदों पर होगी भर्ती; आशा वर्करों और शिक्षकों को भी राहत Chandigarh: हरियाणा में लर्निंग लाइसेंस के नियम बदले, अब पहले सीखनी होगी सेफ ड्राइविंग और फर्स्ट एड New Delhi: दिल्ली प्रदर्शन में 65 लोग घायल, आरएमएल अस्पताल में भर्ती; पुलिसकर्मी भी शामिल New Delhi: भारत और बेनिन मिलकर मजबूत करेंगे चुनाव प्रबंधन व्यवस्था, निर्वाचन कर्मियों के प्रशिक्षण पर बनी सहमति New Delhi: राहुल गांधी का सरकार पर हमला, बोले- छात्रों की आवाज दबाना लोकतंत्र के खिलाफ New Delhi: राष्ट्रपति मुर्मु की मोल्दोवा यात्रा: कृषि, एआई और डिजिटल क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर बनी सहमति Kolkata: दिल्ली छात्र आंदोलन पर ममता का केंद्र पर हमला, बोलीं- लोकतंत्र में लाठी नहीं, संवाद होना चाहिए Chandigarh: 2027 विधानसभा चुनाव लड़ेंगे अमृतपाल सिंह, 'वारिस पंजाब दे' ने सीएम चेहरा घोषित किया Mohali: एयरोट्रोपोलिस विस्तार के लिए 3,523 एकड़ भूमि अधिग्रहण का अवॉर्ड जारी, किसानों को मिलेंगे 23,457 करोड़ रुपये Chandigarh: बेअदबी केस में एसआईटी के सामने पेश हुए सुखबीर बादल, बोले- जांच में करूंगा पूरा सहयोग
Logo
Uturn Time
अस्पतालों की लूट पर स्वास्थ्य विभाग लगाए लगाम
अशोक सहगल लुधियाना, यूटर्न 24 मार्च : निजी असपताल मरीजों को अपनों बनाई फारमैसी से दवाइयां खरीदने को मजबूर नहीं कर सकते, अगर कोई निजी अस्पताल ऐसा करता पाया गया तो उस पर कार्रवाई हो सकती है। उक्त फैसला नैशनल कन्यूमर डिस्प्युट रिड्रेसल कमीशन के 2013 में प के 2013 में पटीशन नम्बर 2448 में सुनाया गया है। गौर है कि निजी अस्पताल मरीजों के दोहन में कोई कसर पड़ना नहीं चाहते इसलिए उपचार के मनमाने दामों के अलावा मरीजों को अस्पताल में बनाई फार्मसी से दवाइयां खरीदने के लिए दवाब बनाया जाता है। यहां तक कि कई अस्पताल बार से मंगाई गई दवाइयों के इस्तेमाल से साफ मना कर हैं। कई जगह सुरक्षा कर्मचारी बाहनी दवा लेकर मरीज को अंदर नहीं आने देते। दवा लेकर मरीज के परिजन किसी तरह अस्पताल के सुरक्षा कमी तथा डॉक्टर उसके इस्तेमाल से मना कर देते हैं और मरीज के परिजनों को दवा अस्पताल को फार्मेसी से खरीद कर लाने की कहा जाता है, जबकि दूसरी और इस बारे में मरीज की शिकायत आने पर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारों भी असमंजस में हैं कि वे ऐसे मामलों में क्या फैसला ले और मरीज भी पशोपेश में है कि यहां शिकायत करे हाकि उसको सुनवाई हो। अस्पतालों पर होगी कार्रवाई ऐसे मामले में उक्त नेशनल कमीशन के 2013 में पटीशन नम्बर-3448 में आए फैसले के तहत कहा गया कि आपतालों की बिजनेस सेंटर की तरह काम नहीं करना चाहिए, जी गंभीर मरीजों से पैसा कमाने की सोचे, जो पहले ही अस्पतालों से बढते बिलों से आहत हो चुका हो, अस्पतालों द्वारा मरीजों को दवाइयां खरीदने के लिए दबाव बनाना यह अनफेयर ट्रेड प्रैक्टिस की तरह है अस्पताल नहीं मचा सकते लूट पंजाब केमिस्ट संगठन का कहना है कि निजी अस्पताल मरीजों को जबरन दवाइयां नहीं बेच सकते। उन्होंने कहा कि कई अस्पताल अधिक मुनाफा कमाने के लिए ब्रांडेड दवाइयों की बजाय अनब्रांडेड दवाइयां बेच रहे हैं और अधिक मुनाफे के चक्कर में कम्पनी से सीधी दवाइयां खरीद रहे हैं। कई अस्पतालों ने तो अपनी दवाइयां बनवानी शुरू कर दी और उसे पर दम भी अपनी मनमर्जी के प्रिंट कर लिए ऐसी लूट को रोकने के लिए ड्रग विभाग कोई जतन नहीं कर रहा जबकि लोगों का कहना है कि अगर मरीज को दवाइयां बाजार से सस्ती मिलती है तो उसे हक है कि वह दवाइयां बाजार से खरीदे क्या है स्टेट कंज्यूमर रिड्रेसल कमिश्नर का फैसला स्टेट कमीशन ने यह फैसला मीनू जैन बनाम जयपुर के एक निजी अस्पताल के मामले में दिया, जिसमें श्रीमती एक गंभीर रोग गुलियन पैरी सिड्डीस से पीड़ित होकर अस्पताल में भर्ती हुई थी। शिकायत में कहा कि उसे जो महंगे इंजेक्शन फार्मेसी से काफी कम कीमत पर उपलब्ध इम मिलसिले में उससे एक लाख 56 हजार 167 रुपए अधिक लिए गए कमीशन अपने फैसले में शिकायतकर्ता को 78 हजार रुपए वापस करने को कहा। उसने निजी अस्पतालों को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर कोई निजी अस्पताल अपनी फार्मेसी से किसी को दवाइयां खरीदने के लिए मजबूर करता है उस पर सख्त कार्रवाई की जा सकती है। क्या कहते हैं स्वास्थ्य अधिकारी अस्पताल की फार्मेसी से दवाइयां खरीदने के लिए दबाव बनाना गलत है, पर इस संबंधी गाइड लाइनें उन्हें स्पष्ट नहीं, मरीज पंजाब मेडिकल काउंसिल में शिकायत कर सकता है। इसके अलावा ऐसी शिकायत राज्य के स्वास्थ्य परिवार कल्याण मंत्री तथा स्थानीय स्तर पर सिविल सर्जन से की जा सकती है दूसरी और कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि कोई रास्ता न मिलने पर मरीज द्वारा कानून का सहारा लिय जा एकता है। मरीज उपभोता अदालत में जा सकता है। अगर पूर्व में किसी के साथ ऐसा हुआ है तो वह दस्तावेज लेकर संबंधित जगहों पर शिकायत कर सकता है अथवा उपभोक्ता अदालत का सहारा ले सकता है स्वास्थ्य विभाग कराए अस्पतालों का सर्वे लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग को चाहिए कि वह ऐसे मामलों में अपने ड्रग विभाग के जरिए अस्पतालों का सर्वे कारण और जहां ऐसी है अनियमितताएं पाई जाती है उसके विरुद्ध कार्रवाई की जाए