Uturn Time
Breaking
Amritsar: ऑपरेशन ब्लू स्टार की याद में Akal Takht में धार्मिक कार्यक्रम शुरू, संगत में भावुक माहौल Chandigarh: बेअंत सिंह हत्याकांड के दोषी हवारा ने मांगी राहत, मां की देखभाल के लिए पैरोल की मांग Hisar: मेजर अमित कुमार ने किया हिसार का नाम रोशन, उत्कृष्ट प्रदर्शन पर मिला सम्मान Hisar: रिश्वतखोरी पर एसीबी का शिकंजा, हिसार में दो पटवारी सहित तीन गिरफ्तार Chandigarh: हरियाणा एसीबी की नई पहल, मोबाइल एप के जरिए भ्रष्टाचार पर लगेगा अंकुश New Delhi: मालवीय नगर अग्निकांड के बाद प्रशासन सक्रिय, पीड़ितों को आर्थिक सहायता देने का निर्णय, मृतकों के परिवारों को 10 लाख New Delhi: ईडी की बड़ी कार्रवाई से हड़कंप, सलीम डोला सिंडिकेट के 21 ठिकानों पर छापेमारी Ludhiana: बिट्टू गुंबर गौसेवा के लिए पूरी तरह समर्पित हैं: दर्शन लाल बवेजा Ludhiana: राजा वडिंग के नेतृत्व में 2027 चुनावों के लिए कांग्रेस पूरी तरह सक्रिय: विपन अरोड़ा Sonipat: उपायुक्त नेहा से मिले पीएम केयर्स योजना के बच्चे, उज्जवल भविष्य को लेकर हुई बातचीत Rewari: हरियाणा में पेयजल व्यवस्था को लेकर सरकार सख्त, रणबीर गंगवा बोले- अधिकारियों की लापरवाही नहीं चलेगी New Delhi: मालवीय नगर अग्निकांड पर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता सख्त, अधिकारियों के साथ शुक्रवार को होगी समीक्षा बैठक
Logo
Uturn Time
मिडिल ईस्ट तनाव का असर फार्मा इंडस्ट्री पर गहराया
अशोक सहगल लुधियाना, 23 मार्च : मिडिल ईस्ट में ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर अब दवा उद्योग पर भी साफ दिखाई देने लगा है। विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले दिनों में आम लोगों को दवाइयों के लिए ज्यादा कीमत चुकानी पड़ सकती है। पिछले दो हफ्तों में दवाओं के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल यानी एक्टिव फार्मा इंग्रीडिएंट्स (API) की कीमतों में करीब **25% तक उछाल** दर्ज किया गया है। आमतौर पर इस्तेमाल होने वाली पैरासिटामोल की कीमत भी लगभग 25% बढ़ चुकी है, जबकि अन्य दवाओं के रॉ मटेरियल में भी लगातार तेजी बनी हुई है। पंजाब होलसेल केमिस्ट एसोसिएशन के प्रधान सुरेंद्र दुग्गल और महासचिव जी.एस. चावला के मुताबिक, युद्ध के कारण यूरोप से आने वाली कच्चे माल की सप्लाई लगभग ठप हो गई है। हालांकि चीन से सप्लाई जारी है, लेकिन वहां से भी आपूर्ति प्रभावित हो रही है, जिससे घरेलू उत्पादन पर दबाव बढ़ गया है। स्थिति का सीधा असर कीमतों पर पड़ने की आशंका है। विशेषज्ञों का मानना है कि नई बैच में आने वाली दवाओं के दाम **15 से 20% तक बढ़ सकते हैं**। इसके अलावा, पेट्रोकेमिकल्स से बनने वाले फार्मा सॉल्वेंट्स की कीमतों में भी तेजी देखी जा रही है। युद्ध के चलते शिपिंग रूट प्रभावित हुए हैं, जिससे माल ढुलाई महंगी हो गई है। कई मामलों में फ्रेट चार्ज दोगुना हो चुका है और कंपनियों को हर शिपमेंट पर हजारों डॉलर अतिरिक्त खर्च करने पड़ रहे हैं। इस बढ़ती लागत के दबाव में फार्मास्यूटिकल कंपनियों ने सरकार से दवाओं की कीमतों में बढ़ोतरी की अनुमति देने की मांग की है। चूंकि भारत में दवाओं के दाम नियंत्रित रहते हैं, ऐसे में कंपनियों के लिए लागत का बोझ उठाना मुश्किल हो रहा है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि हालात जल्द नहीं सुधरे, तो न सिर्फ दवाइयों की कीमतें बढ़ेंगी, बल्कि आवश्यक और जीवनरक्षक दवाओं की उपलब्धता पर भी असर पड़ सकता है। यह संकट अब सिर्फ ऊर्जा या कच्चे तेल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि देश की स्वास्थ्य सुरक्षा पर भी असर डालने लगा है।