उत्तर प्रदेश/ यूटर्न/23 मार्च।उत्तर प्रदेश की राजनीति में महिला वोट बैंक को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। अखिलेश यादव ने अब अपनी रणनीति में “पीडीए” (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के साथ “ए” यानी आधी आबादी को जोड़ते हुए महिलाओं पर फोकस बढ़ा दिया है। लखनऊ में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने घोषणा की कि अगर 2027 में समाजवादी पार्टी की सरकार बनती है, तो “नारी समृद्धि सम्मान योजना” शुरू की जाएगी, जिसके तहत गरीब परिवारों की महिलाओं को सालाना 40 हजार रुपये सीधे बैंक खाते में दिए जाएंगे। इसके साथ ही पुरानी समाजवादी पेंशन योजना को नए रूप में लागू करने का भी वादा किया गया है। कार्यक्रम में उन्होंने मुलायम सिंह यादव की विरासत और अपनी सरकार की योजनाओं—1090 हेल्पलाइन, कन्या विद्याधन योजना और रानी लक्ष्मीबाई योजना—का भी जिक्र किया। वहीं डिंपल यादव ने महिलाओं की भागीदारी को देश की प्रगति के लिए जरूरी बताया। दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी ने इस पर कड़ा पलटवार किया। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और बृजेश पाठक ने सपा पर कानून-व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए। विश्लेषकों का मानना है कि महिला वोट बैंक यूपी की राजनीति में निर्णायक भूमिका निभाता रहा है। ऐसे में नकद सहायता की यह योजना सपा के लिए गेमचेंजर साबित हो सकती है, लेकिन कानून-व्यवस्था और भरोसे का मुद्दा भी उतना ही अहम रहेगा। 2027 के चुनाव में यह मुकाबला और दिलचस्प होने की संभावना है।