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चंडीगढ़/ यूटर्न/23 मार्च।पीजीआई में जल्द ही एक समर्पित (डेडिकेटेड) ट्रांसप्लांट सेंटर स्थापित किया जाएगा। यह घोषणा संस्थान के निदेशक प्रो. विवेक लाल ने ISTS एनुअल कांफ्रेंस 2026 के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए की। उन्होंने कहा कि नया ट्रांसप्लांट सेंटर बनने से संस्थान में ट्रांसप्लांट सेवाओं को एकीकृत किया जाएगा, जिससे इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत होगा, मरीजों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी और ट्रांसप्लांट की संख्या में भी वृद्धि होगी। साथ ही, यह सेंटर प्रशिक्षण, रिसर्च और समन्वय को भी नई दिशा देगा। प्रो. लाल ने ट्रांसप्लांटेशन को सर्जरी का सबसे श्रेष्ठ कार्य बताते हुए कहा कि यह न केवल जीवन बचाता है बल्कि मरीज को सम्मान और नई उम्मीद भी देता है। उन्होंने युवा डॉक्टरों से अपील की कि वे इस क्षेत्र के अग्रदूतों से प्रेरणा लें और समर्पण के साथ कार्य करें। भारत की चिकित्सा विरासत का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इतिहास में पहला ट्रांसप्लांट सुश्रुत द्वारा किया गया था, जो देश के लिए गर्व की बात है। उन्होंने डायलिसिस से गुजर रहे मरीजों की पीड़ा का जिक्र करते हुए कहा कि यह प्रक्रिया जितनी आसान दिखती है, उतनी ही कठिन होती है। ऐसे में ट्रांसप्लांटेशन मरीजों को बेहतर जीवन गुणवत्ता प्रदान करता है। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथियों के रूप में प्रो. एस. एन. मेहता, प्रो. मुकुट मिन्ज और डॉ. वात्सला त्रिवेदी भी मौजूद रहे। उन्होंने ट्रांसप्लांट क्षेत्र के शुरुआती संघर्षों और विकास की यात्रा साझा की। वहीं, इंडियन सोसाइटी ऑफ़ ट्रांसप्लांटेशन के प्रतिनिधि डॉ. हर्षा जौहरी ने कहा कि ऐसी कॉन्फ्रेंस वैज्ञानिक आदान-प्रदान और सहयोग को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाती हैं। कार्यक्रम के अंत में प्रो. आशीष शर्मा ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत करते हुए कहा कि यह सम्मेलन ट्रांसप्लांट साइंस को आगे बढ़ाने और मरीजों के बेहतर इलाज के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है।