अपने आप को जानने और आंतरिक शांति के लिए आज ध्यान सबसे शक्तिशाली साधन है। यह मन को शांत कर, विचारों को एकाग्र करने और स्व-जागरूकता बढाने में मदद करता है। नियमित ध्यान से आप तनावमुक्त होकर, अपनी वास्तविक क्षमता और अंतरात्मा से जुड़ सकते हैं।उक्त शब्द रजनीश तंत्रा टेम्पल के स्वामी ध्यान सुमित ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहे।उन्होंने आगे कहा कि आजकल समाज में मन भटकाव के कारण धर्म परिवर्तन बड़ी तेजी से फैल रहा है।कुछ लोग अपना धर्म छोड़कर दूसरे धर्म को अपना रहे हैं।
उन लोगों को ऐसे महसूस होता है कि शायद दूसरे धर्म में हमें कुछ अलग परमात्मा की कृपा प्राप्त हो जो शायद उनको अपने धर्म में न प्राप्त हुई हो।परंतु ऐसा कुछ नहीं है।आप जिस भी धर्म को अपना लो।परमात्मा की कृपा सदैव एक जैसी ही होती है।लेकिन जब हम ध्यान में अपना मन लगाते है तो हमारा मन स्थिर हो जाता है क्योंकि ध्यान का उद्देश्य मन को जबरदस्ती रोकना नहीं है, बल्कि भटकते विचारों को कंट्रोल कर मन को स्थिर करना है, जिससे एकाग्रता बढ़ती है।उन्होंने कहा कि जब आप ध्यान में स्थिर होते हैं, तो मन एक ही विचार या ध्येय पर टिकना सीखता है, जिससे मन की कमजोरी दूर होती है और वह बाहरी प्रलोभनों या ।
धर्म परिवर्तन, से प्रभावित नहीं होता है। ध्यान आत्म-जागरूकता को बढ़ाता है।