गुस्ताखी माफ
मौसम ने भी आजकल, पकड़ रखा पाखंड।
गर्म बहुत था फरवरी, हुई मार्च में ठंड।
हुई मार्च में ठंड, घिरे हैं बादल ऐसे।
लगी हुई है झड़ी, झड़ी सावन की जैसे।
कह साहिल कविराय, अजब मौसम का फंडा।
गर्म करे अप्रैल, मई हो फिर से ठंडा।
प्रस्तुति --- डॉ. राजेन्द्र साहिल