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चंडीगढ़/ यूटर्न/20 मार्च।सुखना कैचमेंट एरिया और सुखना विडलाइफ संक्चुअरी के इको-सेंसिटिव ज़ोन (ESZ) में हुए अवैध निर्माणों पर कानूनी और प्रशासनिक शिकंजा कसता जा रहा है। केंद्र सरकार के सख्त निर्देशों और न्यायपालिका के कड़े रुख के बीच अब इन इलाकों में रहने वाले लोगों पर ‘दोहरी मार’ पड़ती नजर आ रही है। हाई कोर्ट ने बिजली कनेक्शन पर राहत देने से किया इनकार हाल ही में दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति जगमोहन बंसल की अदालत ने अवैध कॉलोनियों में बिजली कनेक्शन देने को लेकर कोई सीधा आदेश देने से इनकार कर दिया। याचिकाकर्ताओं ने ‘जीवन के अधिकार’ (अनुच्छेद 21) के तहत बिजली जैसी मूलभूत सुविधा की मांग की थी, लेकिन अदालत ने कहा कि मामला पहले से डिवीजन बेंच के समक्ष विचाराधीन है। ऐसे में इस स्तर पर हस्तक्षेप उचित नहीं होगा और याचिकाकर्ताओं को डिवीजन बेंच के समक्ष जाने को कहा गया। बिजली निगम ने जताई असमर्थता पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड ने भी कोर्ट में स्पष्ट किया कि पूर्व के अंतरिम आदेशों के चलते वह इन क्षेत्रों में बिजली, पानी और सीवरेज जैसी सुविधाएं देने में असमर्थ है। निगम ने कांसल क्षेत्र के निवासियों के लिए अस्थायी बिजली कनेक्शन की अनुमति मांगी थी, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया। केंद्र सरकार का 1 किलोमीटर ESZ नियम मिनिस्ट्री ऑफ़ एनवायरनमेंट , फारेस्ट एंड क्लाइमेट चेंज ने 3 दिसंबर 2025 को पंजाब सरकार को निर्देश दिया है कि अभयारण्य के चारों ओर कम से कम 1 किलोमीटर का इको-सेंसिटिव ज़ोन अधिसूचित किया जाए। यह निर्देश 2 मार्च 2020 के हाई कोर्ट के आदेश के अनुरूप है। इस फैसले से सुखना एन्क्लेव, ट्रिब्यून कॉलोनी, कांसल, कैंबवाला, नयागांव और सकेतड़ी जैसे इलाकों में बने हजारों मकानों पर खतरा मंडराने लगा है। ‘लिविंग एंटिटी’ आदेश का असर हाई कोर्ट पहले ही सुखना झील को ‘जीवित इकाई’ घोषित कर चुका है और 2011 के बाद हुए निर्माणों को हटाने के निर्देश दे चुका है, साथ ही प्रभावित लोगों को मुआवजा देने की बात भी कही गई थी। अब इस आदेश के सख्ती से लागू होने की संभावना जताई जा रही है। चीफ जस्टिस की सख्त टिप्पणी मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने सख्त टिप्पणी करते हुए पूछा, “झील को और कितना सुखाओगे?” अदालत ने बिल्डर माफिया और कथित राजनीतिक संरक्षण पर भी सवाल उठाए हैं, जिससे संबंधित अधिकारियों पर भी कार्रवाई की संभावना बढ़ गई है। निवासियों में दहशत, प्रॉपर्टी बाजार प्रभावित प्रशासनिक सख्ती के चलते इन क्षेत्रों में नई सरकारी सुविधाएं पूरी तरह बंद हैं। कई मध्यमवर्गीय परिवार, जिन्होंने इन इलाकों में निवेश किया था, अब नुकसान की आशंका से चिंतित हैं। लोग अपनी संपत्तियां बेचने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन कानूनी अनिश्चितता के कारण खरीदार नहीं मिल रहे। जल्द आ सकता है बड़ा फैसला पूरा मामला अब डिवीजन बेंच के समक्ष लंबित है और आने वाले समय में इस पर बड़ा फैसला आने की संभावना है, जिससे इन अवैध निर्माणों का भविष्य तय होगा।