जगरांव/यूटर्न/20 मार्च।
स्थानीय नगर परिषद दफ्तर में आज उस समय माहौल तनावपूर्ण हो गया, जब NOC (एनओसी) और नक्शा पास करवाने के मामले को लेकर विवाद इतना बढ़ गया कि नगर परिषद गवर्नमेंट के कार्यकारी प्रधान कंवरपाल सिंह को अपने साथियों सहित कार्यकारी अधिकारी (EO) के दफ्तर के बाहर धरना देना पड़ा। हालांकि, कुछ ही मिनटों बाद पूरे मामले को “गलतफहमी” बताते हुए धरना समाप्त कर दिया गया, लेकिन इस घटनाक्रम ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या है पूरा मामला?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, जगरांव के कांग्रेसी नेता सुखपाल खैहरा ने नगर परिषद के EO मोहित शर्मा पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें 75 गज के कमर्शियल प्लॉट की NOC जारी करने के लिए जानबूझकर परेशान किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि सरकारी निर्देशों के मुताबिक इतनी जमीन के लिए फायर ब्रिगेड विभाग की NOC की जरूरत नहीं होती, फिर भी उनसे 14,100 रुपये की फीस जमा करवाई गई।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस काम के लिए कथित तौर पर 50 हजार रुपये की रिश्वत मांगी जा रही है।
बातचीत के दौरान बढ़ी तल्खी, धरना शुरू:-
सूत्रों के मुताबिक, जब इस मामले को लेकर कार्यकारी प्रधान के दफ्तर में EO शर्मा के साथ बैठक चल रही थी, तो EO ने स्पष्ट किया कि वे सरकारी नियमों और कानूनी प्रक्रिया के तहत ही काम कर रहे हैं और आवश्यक दस्तावेज ही मांगे गए हैं। इसके बाद EO अपने दफ्तर चले गए।
इस पर नाराज होकर कार्यकारी प्रधान, खैहरा और अन्य पार्षदों ने EO दफ्तर के बाहर जमीन पर बैठकर धरना शुरू कर दिया और जमकर नारेबाजी की।
क्या कहना है EO का:-
जब पत्रकारों ने EO शर्मा से इस मामले पर बात करने की कोशिश की, तो उन्होंने पहले कहा कि वे विधायक बीबी सरबजीत कौर मानुंके से पूछे बिना कुछ नहीं कहेंगे। बाद में उन्होंने कहा कि यह केवल एक गलतफहमी है, जिसे बातचीत से सुलझा लिया जाएगा।
पार्षद पति ने भी उठाए सवाल:-इस मौके पर वार्ड नंबर 13 की महिला पार्षद अनीता सभरवाल के पति रविंदर कुमार (फीना) ने भी नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब चुने हुए प्रतिनिधियों को ही NOC लेने के लिए परेशान होना पड़ रहा है, तो आम जनता की स्थिति क्या होगी।
मामला सुलझा, ‘गलतफहमी’ करार:-कुछ समय बाद वाइस अध्यक्ष अध्यक्ष जगजीत सिंह जग्गी और आम आदमी पार्टी के अन्य नेताओं की मौजूदगी में EO शर्मा ने मीडिया के सामने अपना पक्ष रखा। उन्होंने रिश्वत के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि नगर परिषद में पूरी पारदर्शिता से काम होता है।
उन्होंने बताया कि किसी तीसरे व्यक्ति द्वारा गलत तरीके से बात पेश किए जाने के कारण यह गलतफहमी पैदा हुई थी, जिसके चलते धरना लगाया गया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कमर्शियल इमारतों के लिए फायर ब्रिगेड विभाग की NOC सरकारी नियमों के अनुसार आवश्यक है।
दूसरी ओर कंवरपाल सिंह ने भी बाद में कहा कि धरना केवल गलतफहमी के कारण लगाया गया था और अब मामला सुलझ चुका है।
जनता के लिए उठे सवाल
भले ही इस मामले को “गलतफहमी” कहकर शांत कर दिया गया हो, लेकिन शहरवासियों में यह चर्चा शुरू हो गई है कि यदि सत्ता पक्ष के नेताओं को ही अपने अधिकारियों के खिलाफ धरना देना पड़ रहा है, तो आम जनता के काम इन दफ्तरों में कैसे और कब होंगे?