चंडीगढ़/यूटर्न/19 मार्च। मामले से परिचित लोगों ने बताया कि भारत ओमान की खाड़ी और अरब सागर में अतिरिक्त युद्धपोत भेज रहा है, ताकि उसके जहाजों का सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित किया जा सके। ऐसा इस उम्मीद में किया जा रहा है कि ईरान अपने और भी ईंधन टैंकरों को होर्मुज जलडमरूमध्य से बाहर निकलने की अनुमति दे सकता है। इन लोगों ने बताया कि भारतीय नौसेना एहतियाती कदम के तौर पर इस इलाके में आधे दर्जन से ज़्यादा युद्धपोत तैनात कर रही है, जिनमें लॉजिस्टिक्स जहाज भी शामिल हैं। इन लोगों ने अपनी पहचान ज़ाहिर न करने की शर्त पर यह जानकारी दी, क्योंकि ये चर्चाएँ निजी थीं। उन्होंने बताया कि ये युद्धपोत होर्मुज जलडमरूमध्य के पूर्व में तैनात रहेंगे और जलमार्ग में प्रवेश नहीं करेंगे। उनका उद्देश्य जहाजों को तब तक सुरक्षा देना होगा, जब तक वे उत्तरी अरब सागर के सुरक्षित जलक्षेत्र में नहीं पहुँच जाते।
एलपीजी गैस टैंकरों की सुरक्षा सुनिश्चित
हाल के दिनों में भारत ने लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) ले जा रहे दो सरकारी टैंकरों का सुरक्षित पारगमन सुनिश्चित किया है, और अब वह ईरान के साथ बातचीत कर रहा है ताकि कई और ईंधन जहाजों को भी वहाँ से गुज़रने की अनुमति मिल सके। फरवरी के अंत में जब से अमेरिका और इज़रायल ने ईरान पर हवाई हमले शुरू किए हैं, तब से होर्मुज जलडमरूमध्य प्रभावी रूप से बंद हो गया है। इसके चलते भारत में गैस की भारी किल्लत हो गई है, क्योंकि भारत अपनी LPG का लगभग 90% आयात मध्य-पूर्व से ही करता है।
भारत ने नहीं दी प्रतिक्रिया
भारत ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की उस माँग पर सीधे तौर पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है, जिसमें उन्होंने अन्य देशों से होर्मुज जलडमरूमध्य में युद्धपोत भेजने का आग्रह किया था, ताकि जहाजों को वहाँ से गुज़रने में मदद मिल सके। भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस सप्ताह की शुरुआत में पत्रकारों को बताया था कि इस मामले पर अमेरिका के साथ "द्विपक्षीय स्तर पर" कोई चर्चा नहीं हुई है। मंत्रालय और भारतीय नौसेना ने इस मामले पर टिप्पणी के अनुरोध का तत्काल कोई जवाब नहीं दिया।
भारत की पुरानी नीति
भारत की पुरानी नीति यह रही है कि वह संयुक्त राष्ट्र के जनादेश के तहत ही अंतर्राष्ट्रीय सैन्य अभियानों में हिस्सा लेता है, न कि किसी एक देश द्वारा की गई एकतरफा कार्रवाइयों का साथ देता है। संघर्ष वाले क्षेत्रों में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा के लिए युद्धपोत भेजना भारत के लिए कोई नई बात नहीं है। वर्ष 2024 में, यमन में ईरान समर्थित हूथी विद्रोहियों द्वारा किए गए समुद्री डाकुओं के हमलों के बाद, भारतीय नौसेना ने अरब सागर में कम से कम एक दर्जन युद्धपोत तैनात किए थे।
भारतीय नौसेना बनाए रखती उपस्थिति
भारतीय नौसेना के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी डी.के. शर्मा ने बताया कि नौसेना ओमान की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास के समुद्री क्षेत्रों में अपनी उपस्थिति बनाए रखती है। इसका उद्देश्य "भारतीय ध्वज वाले व्यापारिक जहाजों को सुरक्षा का भरोसा दिलाना और ऊर्जा की आपूर्ति में किसी भी तरह की रुकावट न आने देना सुनिश्चित करना" है। इस मामले से परिचित लोगों ने बताया कि ये युद्धपोत 'ऑपरेशन संकल्प' के तहत तैनात किए जा रहे हैं। यह 2019 का एक मिशन है जिसका मकसद खाड़ी क्षेत्र में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा करना और भारत के समुद्री हितों की रक्षा करना है।
भारत के 22 जहाज फंसे
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, फ़ारसी खाड़ी में भारत का झंडा लगे 22 जहाज़ फँसे हुए हैं, जिनमें छह LPG कैरियर, एक लिक्विफाइड नेचुरल गैस ले जाने वाला जहाज़ और चार कच्चे तेल के टैंकर शामिल हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले हफ़्ते के आखिर में कहा था कि उन्होंने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन के साथ "इस क्षेत्र की गंभीर स्थिति" पर चर्चा की है, जिसमें जलडमरूमध्य से जहाज़ों के सुरक्षित गुज़रने के तरीकों पर भी बात हुई।
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