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चंडीगढ़/ यूटर्न/19 मार्च।अमेरिका व्यापार समझौता (ट्रेड डील) पर किसानों और आम जनता की ओर से तीव्र विरोध की आवाज उठ रही है। इस डील को लेकर किसानों का कहना है कि अगर कृषि क्षेत्र को इस मुक्त व्यापार समझौते में शामिल किया जाता है, तो इसके परिणाम भारतीय किसानों के लिए बेहद खतरनाक होगा गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि छोटे किसान बड़े अमेरिकी किसानों के मुकाबले प्रतिस्पर्धा में नहीं टिक पाएंगे, जिससे देश कि खेती की स्थिति गंभीर संकट में पड़ सकती है। गुरनाम सिंह चढूनी ने यह भी आरोप है कि इस व्यापार समझौते से न सिर्फ कृषि, बल्कि देश की समग्र अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ेगा। विशेष रूप से डेयरी क्षेत्र, खाद्य सुरक्षा, MSP नीति और सरकारी खरीद प्रणाली जैसी नीतियों पर अंतरराष्ट्रीय दबाव पड़ सकता है। साथ ही, बहुराष्ट्रीय कंपनियों का खेती व किसानों पर नियंत्रण बढ़ सकता है, जिससे उनकी स्थिति और भी दयनीय हो जाएगी। भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के प्रभाव 1. सस्ते आयात से स्थानीय बाजार पर असर अमेरिका में किसानों को बड़ी सब्सिडी मिलने के कारण उनके उत्पाद जैसे गेहूं, मक्का, सोयाबीन और डेयरी उत्पाद भारत में सस्ते हो सकते हैं। इससे भारतीय किसान को कम दाम पर अपनी उपज बेचनी पड़ेगी और स्थानीय बाजार पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। 2. डेयरी क्षेत्र पर प्रतिकूल प्रभाव भारत का डेयरी सेक्टर करीब 8 करोड़ परिवारों से जुड़ा हुआ है। अमेरिका से डेयरी उत्पादों का आयात बढ़ने से भारतीय डेयरी उत्पादकों को भारी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ेगा, जिससे उनका व्यापार प्रभावित हो सकता है। 3. बीज और कृषि कंपनियों पर नियंत्रण इस व्यापार समझौते के कारण बहुराष्ट्रीय कंपनियों का कृषि क्षेत्र पर नियंत्रण बढ़ सकता है। इससे भारतीय किसानों को महंगे बीज, कीटनाशक और कृषि तकनीकी उपकरण खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। 4. कानूनी बदलाव का दबाव गुरनाम सिंह चढूनी का आरोप है कि इस समझौते के जरिए भारत पर खाद्य सुरक्षा और MSP (न्यूनतम समर्थन मूल्य) जैसी नीतियों पर अंतरराष्ट्रीय दबाव डाला जा सकता है, जिससे सरकार को इन नीतियों में बदलाव करना पड़ सकता है। गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता (ट्रेड डील) तीन कृषि कानूनों से भी ज़्यादा खतरनाक हो सकती है अगर अमेरिका के साथ ट्रेड समझौते में खेती को खोल दिया गया, तो उसे वापस लेना आसान नहीं होगा। लेकिन अंतरराष्ट्रीय ट्रेड एग्रीमेंट हो गया तो उसे बदलना मुश्किल होता है। जन क्रांति की अपील: सरकार से तत्काल कदम उठाने की मांग भारतीय किसान यूनियन चढूनी और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भारत की जनता से अपील की है कि इस डील के खिलाफ जन जागरूकता फैलाकर इसे रद्द करवाने की दिशा में संघर्ष किया जाए। किसानों और आम जनता की प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं: 1. अमेरिकी व्यापार समझौता तुरंत रद्द करें: यह डील भारत के छोटे किसानों और कृषि क्षेत्र के लिए खतरनाक साबित हो सकती है। इसका तत्काल रद्द होना आवश्यक है। 2. शिक्षा और चिकित्सा सेवाओं को मुफ्त किया जाए: देश की आम जनता को शिक्षा और चिकित्सा सेवाओं की लूट से बचाने के लिए इन्हें मुफ्त किया जाए। 3. MSP की कानूनी गारंटी और कर्ज माफी: किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर अपनी फसल बेचने की कानूनी गारंटी दी जाए, और उनका कर्ज माफ किया जाए। 4. नए बीज बिल और बिजली संशोधन बिल को रद्द किया जाए: ये दोनों बिल निजी कंपनियों के नियंत्रण में जा रहे हैं, जिससे किसानों की स्थिति और भी कमजोर हो सकती है। 5. धान घोटाले पर कार्रवाई: राज्य सरकार द्वारा धान घोटाले में की गई लापरवाही और भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और इस मामले की जांच सी.बी.आई. से कराई जाए। 6. गेहूं पर राजस्थान की तर्ज पर बोनस दिया जाए: किसानों को गेहूं की फसल पर राजस्थान की तरह 150 रुपये प्रति क्विंटल बोनस दिया जाए। भारतीय किसान यूनियन चढूनी संगठन का कहना है कि अगर सरकार ने इन मांगों को गंभीरता से नहीं लिया, तो पूरे देश में आंदोलन और विरोध तेज हो सकता है। गुरनाम सिंह चढूनी का कहना है कि भारतीय किसानों और आम जनता के अधिकारों की रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है, और इस दिशा में ठोस कदम उठाना जरूरी है। गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि यह लड़ाई सिर्फ कृषि क्षेत्र की नहीं, बल्कि देश की समृद्धि और जनता की भलाई की भी है। अगर सरकार ने इस मामले में कोई कदम नहीं उठाया, तो यह जनक्रांति का रूप ले सकती है, जो भारतीय जनता की आवाज को बुलंद करने का काम करेगी। इस मुद्दे पर जल्द ही नई पहल की आवश्यकता है, ताकि किसानों और आम जनता को उनके अधिकार मिल सकें और देश की अर्थव्यवस्था सुरक्षित रह सके। गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा की अगर सरकार द्वारा उक्त मांगे नही मानी गई तो 23 मार्च को अनाज मंडी पिपली कुरुक्षेत्र में होने वाली किसान मजदुर जन क्रान्ति रैली में किसी भी प्रकार का कठोर फैसला लिया जाएगा