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चंडीगढ़/यूटर्न/ 14मार्च। सेक्टर-26 मंडी में इन दिनों फर्जी दस्तावेजों के आधार पर लाइसेंस हासिल करने का एक गंभीर मामला गरमाया हुआ है, जिससे मार्केट कमेटी की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, 'अमन फ्रूट एंड वेजिटेबल ट्रेडिंग कंपनी' (संचालक संजय प्रकाश और भरत प्रकाश) पर आरोप है कि उन्होंने परिसर के वास्तविक मालिक रामू (एससीओ नम्बर 26) के जाली हस्ताक्षर और फर्जी रेंट एग्रीमेंट का उपयोग करके अपना सेल एंड परचेज का लाइसेंस रिन्यू कराया है। इस धोखाधड़ी की पुष्टि खुद संपत्ति मालिक रामू ने मार्केट कमेटी को दिए अपने लिखित बयान में की है, जिसमें उन्होंने स्पष्ट किया है कि उन्होंने कभी किसी को रेंट पर अपनी दुकान नही दी है। हैरानी की बात यह है कि जालसाजी का ये मामला माननीय राज्यपाल के पास पहुँचने के बावजूद, 2022 में तत्कालीन सेक्रेटरी शर्मा, मार्केट कमेटी और फिर 2025 में राजीव तिवारी, संयुक्त सचिव मार्केटिंग बोर्ड ने कार्रवाई करने के बजाय उसी विवादित कंपनी का लाइसेंस दोबारा रिन्यू कर दिया। यह विभाग के भीतर बैठे अधिकारियों की गहरी मिलीभगत को उजागर करता है।आशंका जताई जा रही है कि मंडी में ऐसे कई अन्य फर्जी लाइसेंस भी सक्रिय हो सकते हैं, जो पूरी व्यवस्था को खोखला कर रहे हैं। जानकारी अनुसार उक्त कंपनी का 2019 में लाइसेंस रिन्यू होना था। उस समय संजय प्रकाश ने मौजूदा मालिक मंगला देवी एससीओ नम्बर-3 से रेंट अग्रीमेंट लेकर मार्केट कमेटी में दे दिया,लेकिन संजय प्रकाश ने न तो कब्जा लिया और न ही किराया दिया। इसके बाद मंगला देवी ने मार्किट कमेटी को लिख कर दे दिया कि अमन फ्रूट एन्ड वेजीटेबल्स कम्पनी का मुझसे कोई लेना देना नही है। लाइसेंस रिन्यू करवाने के लिए फिर संजय प्रकाश ने रामू को सम्पर्क किया लेकिन उसने भी रेंट एग्रीमेंट देने से मना कर दिया। जिसके बाद संजय प्रकाश ने रेंट अग्रीमेंट बनाकर उसमे रामू के जाली हस्ताक्षर कर मार्किट कमेटी में दे दिया और लाइसेंस रिन्यू करवा लिया। कुछ महीनों बाद जब रामू को पता चला कि संजय प्रकाश ने उसके फ़र्ज़ी हस्ताक्षर कर के धोखे से अपना लाइसेंस रिन्यू करवा लिया है तो उसने मार्केट कमेटी को लिखित में दिया कि उसने कभी अमन फ्रूट एंड वेजिटेबल ट्रेडिंग कंपनी को रेंट एग्रीमेंट नही दिया है। हैरानी की बात है करीब 4 साल से भी ज़्यादा समय बीत जाने के बाद मार्किट कमेटी ने इस फर्जीवाड़े की जानकारी होने के बाद भी उस पर कोई कानूनी कार्रवाई न करते हुए उसका लाईसेंस रिन्यू कर दिया। जबकि मामला 420 का है। ये लाइसेंस हर तीन साल में रिन्यू होता है और नियम है कि अगर कोई तय समय में लाइसेंस रिन्यू नही करवाता(जिसके लिए रिटेलर की मंडी में किसी शोरूम में किराये पर दुकान होनी चाहिए) है तो उसका लाइसेंस स्वत: रद्द हो जाता है।