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नई दिल्ली 10 मार्च । राज्यसभा में सांसद राजिंदर गुप्ता ने सार्वजनिक पदाधिकारियों द्वारा सोशल मीडिया के बढ़ते उपयोग पर चिंता व्यक्त करते हुए देश में एक स्पष्ट राष्ट्रीय सोशल मीडिया नीति बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में कुछ वरिष्ठ नौकरशाहों, जिनमें आईएएस और आईपीएस अधिकारी शामिल हैं, द्वारा अपने व्यक्तिगत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सरकारी कार्यों का प्रचार करने की प्रवृत्ति बढ़ी है। सांसद ने कहा कि शासन में पारदर्शिता आवश्यक है, लेकिन सार्वजनिक पद को व्यक्तिगत प्रचार का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि कई मामलों में अधिकारी छापों, निरीक्षणों और प्रवर्तन कार्रवाइयों के नाटकीय वीडियो अपने निजी सोशल मीडिया खातों पर साझा करते हैं, जिनमें सिनेमाई अंदाज में दृश्य प्रस्तुत किए जाते हैं। इससे प्रशासनिक गरिमा प्रभावित हो सकती है। राजिंदर गुप्ता ने यह भी चिंता जताई कि कई बार सरकारी कार्रवाई से जुड़ी जानकारी पहले व्यक्तिगत सोशल मीडिया पर सामने आ जाती है, जबकि आधिकारिक सरकारी सूचना बाद में जारी होती है। उन्होंने कहा कि यह प्रवृत्ति संस्थागत संचार व्यवस्था के लिए उचित नहीं है। उन्होंने विशेष रूप से यह भी कहा कि जब मामला न्यायिक अधिकारियों या अदालत से जुड़े पदाधिकारियों का हो, तब यह मुद्दा और अधिक संवेदनशील हो जाता है, क्योंकि न्यायपालिका की विश्वसनीयता संयम, निष्पक्षता और जनता के विश्वास पर आधारित होती है। सांसद ने सरकार से मांग की कि वर्तमान डिजिटल युग को ध्यान में रखते हुए सार्वजनिक पदाधिकारियों के लिए एक स्पष्ट राष्ट्रीय सोशल मीडिया नीति बनाई जाए, जिससे आधिकारिक संचार और व्यक्तिगत प्रचार के बीच स्पष्ट अंतर सुनिश्चित किया जा सके तथा संवेदनशील या विचाराधीन मामलों की जानकारी साझा करने पर उचित नियंत्रण हो।