Uturn Time
Breaking
दिल्ली में पीएम मोदी से मिले CM विजय, 12 साल बाद खास मुलाकात Chandigarh: हरियाणा सरकार ने बनाया सफाई कर्मचारी आयोग, ईश्वर सिंह को मिली चेयरमैन की जिम्मेदारी Sonipat: ऑनलाइन लिंक भेजकर ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश, तीन गिरफ्तार Dharamshala: तिब्बती सरकार-इन-एग्जाइल में दूसरी बार शपथ लेकर पेंपा सेरिंग ने दोहराया भरोसा Panipat: गला घोंटकर युवक की हत्या का खुलासा, पुलिस ने मां-बेटे को हत्या के आरोप में पकड़ा सट्‌टेबाजी के पैसे की निकासी के लिए होटल इंडस्ट्री बन रही गेटवे ? Sirsa: आईजी का सख्त आदेश: धमकी कॉल करने वालों को वेरिफाई करें, हर कॉल की जांच करें Chandigarh: हरियाणा सरकार का कदम, गिग वर्कर्स का होगा रजिस्ट्रेशन एससी ने देशव्यापी एसआईआर को सही ठहराया, कहा - चुनावी निष्पक्षता से समझौता नहीं किया जा सकता भाजपा पंजाब में नेतृत्व पर निर्णय; रवनीत बिट्टू बन सकते है चेहरा वॉर्ड 31 के साथ सौतेलों जैसे व्यवहार, कांग्रेसी बोले हमारी सरकार आएगी तो काम करवाएगें, सत्ताधारियों का ध्यान नहीं, जनता बीच में लटकी Chandigarh: शिकायत पर कार्रवाई करने के लिए मांगी रिश्वत, सहायक उपनिरीक्षक को विजिलेंस ब्यूरो ने रंगे हाथ किया काबू
Logo
Uturn Time
होशियारपुर/दलजीत अज्नोहा प्राचीन धार्मिक नगरी पिहोवा स्थित सरस्वती तीर्थ पर गंगाराम जी की गद्दी में आध्यात्मिक और ऐतिहासिक परंपराओं की गूंज आज भी सुनाई देती है। इसी पावन स्थल पर दीपक शास्त्री सरस्वती तीर्थ के मुख्य पुरोहित की ओर विशेष रूप में बताया के यहां की प्राचीन परंपराओं, इतिहास और कर्मकांड की विधियों के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त की। मुख्य पुरोहित ने बताया कि यह तीर्थ स्थल आदिकाल से अकाल मृत्यु प्राप्त व्यक्तियों की आत्मा की शांति और मुक्ति के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है। यहां पिंडदान और श्राद्ध कर्म की परंपरा सदियों से चली आ रही है। मान्यता है कि यहां विधिवत कर्मकांड कराने से मृत आत्मा को गति और मोक्ष की प्राप्ति होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, त्रेता युग में भगवान श्री राम ने अपने पिता महाराज दशरथ की अकाल मृत्यु के पश्चात उनकी आत्मा की शांति और मुक्ति के लिए इसी पवित्र तीर्थ पर श्राद्ध कर्म कराया था। यह उल्लेख रामायण की कथाओं से भी जुड़ा हुआ माना जाता है। तभी से यहां पिंडदान और श्राद्ध की परंपरा निरंतर चली आ रही है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि इस तीर्थ की विशेष महिमा के कारण यहां किए गए कर्मकांड का फल कई गुना अधिक प्राप्त होता है। एक अन्य पौराणिक कथा के अनुसार, द्वापर युग में भगवान कृष्ण पांडवों को इस पावन स्थल पर लेकर आए थे, ताकि महाभारत युद्ध में मारे गए कौरवों की आत्मा की शांति हेतु विधिपूर्वक क्रिया-कर्म संपन्न कराया जा सके। यह प्रसंग महाभारत से जुड़ा हुआ माना जाता है, जिससे इस तीर्थ की महत्ता और भी बढ़ जाती है। आज भी जीवित है परंपरा मुख्य पुरोहित ने बताया कि देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान और श्राद्ध कराने आते हैं। विशेष रूप से अमावस्या, पितृ पक्ष और अन्य धार्मिक अवसरों पर यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। प्रवक्ता मुताबिक इस तीर्थ की ऐतिहासिक और आध्यात्मिक पृष्ठभूमि समाज को अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य करती है। उन्होंने इसे भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा का जीवंत प्रतीक बताया। पिहोवा का यह प्राचीन सरस्वती तीर्थ न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि यह हमारी पौराणिक विरासत और संस्कृति की अमूल्य धरोहर भी है, जो आज भी श्रद्धा, विश्वास और परंपरा के साथ आगे बढ़ रही है।