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कोर्ट अवमानना में गुरप्रीत सिद्धू दोषी, एक साल की न्यायिक हिरासत को ही सजा माना - Uturn Time
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चंडीगढ़ 03 March । जिला अदालत ने रियल एस्टेट कंपनी ‘इमर्जिंग इंडिया’ के मैनेजिंग डायरेक्टर गुरप्रीत सिंह सिद्धू को अदालत की कार्यवाही से गैरहाजिर रहने के मामले में दोषी ठहराया है। अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि सिद्धू पिछले एक वर्ष से न्यायिक हिरासत में हैं और यह अवधि उनके लिए पर्याप्त सबक है, इसलिए इस प्रकरण में अतिरिक्त सजा देने की आवश्यकता नहीं है। पेशी से गैरहाजिर रहने पर घोषित हुए थे भगोड़ा सिद्धू के खिलाफ विभिन्न उपभोक्ता मामलों की सुनवाई के दौरान अदालत में पेश न होने पर उन्हें भगोड़ा घोषित किया गया था। इसके बाद चंडीगढ़ पुलिस ने अप्रैल 2025 में उन्हें गिरफ्तार कर लिया था। तब से वह जेल में बंद हैं। कई मामले अब भी लंबित सूत्रों के अनुसार, सिद्धू के खिलाफ 10 से अधिक आपराधिक मामले, दर्जनों उपभोक्ता शिकायतें और कई सिविल केस लंबित हैं। उपभोक्ता मंचों में भी उनके खिलाफ अनेक शिकायतें विचाराधीन हैं। हालांकि इस विशेष मामले में अदालत ने एक साल की हिरासत को ही सजा मान लिया है, लेकिन अन्य लंबित मामलों के चलते फिलहाल उनकी रिहाई संभव नहीं है। वे आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी होने तक जेल में ही रहेंगे। अदालत के इस फैसले को न्यायिक अनुशासन और अदालत की कार्यवाही की गंभीरता के संदेश के रूप में देखा जा रहा है।