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फंड सिर्फ चुनाव वाले राज्यों को ही दिए जा रहे: डॉ. बलबीर सिंह कहा, किसान आंदोलन ने केंद्र को कृषि कानून रद्द करने के लिए किया था मजबूर, गरीब विरोधी योजनाओं के विरुद्ध उसी तरह का संघर्ष शुरू करने की चेतावनी चंडीगढ़, 30 दिसंबर भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर तीखा हमला करते हुए पंजाब के कैबिनेट मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने आज ‘विकसित भारत - रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) के लिए गारंटी’ (वीबी-जी राम जी) को केंद्र की एक सकुंचित चाल और महात्मा गांधी का दूसरा कत्ल करार दिया। उन्होंने केंद्र पर गारंटीशुदा रोजगार के सिद्धांतों को योजनाबद्ध ढंग से खत्म करते हुए देश के लोगों को गुमराह करने के लिए संकुचित चालें चलने का आरोप लगाया। 16वीं पंजाब विधान सभा के विशेष सत्र के दौरान सरकारी प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान सदन को संबोधित करते हुए कैबिनेट मंत्री ने केंद्र की लोमड़ी चालें उजागर कीं। उन्होंने कहा कि भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार द्वारा ‘मुंह में राम राम, बगल में छुरी’ वाली रणनीति अपनाई जा रही है। वे गरीबों की भलाई की महज बात ही करते हैं लेकिन उनकी नीतियां गरीबों की भलाई के उलट काम करने वाली हैं। कैबिनेट मंत्री ने योजना के नाम पर सवाल उठाते हुए कहा कि योजना के नाम ‘राम जी’ का भगवान राम से क्या संबंध है? असल ‘मर्यादा पुरुषोत्तम’ ने गरीबों की भलाई के लिए काम किया लेकिन केंद्र की यह योजना इसके बिलकुल उलट है। लोगों की पीठ में मारी गईं इन ‘छुरियों’ के बारे में विस्तार से बात करते हुए, डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि पहली छुरी वीबी जी राम जी स्कीम है, जो महात्मा गांधी के दूसरे कत्ल के बराबर है। उन्होंने आगे बताया कि कैसे केंद्र ने मांग आधारित से सप्लाई आधारित मॉडल की ओर कदम बढ़ाए हैं, जिसके तहत नौकरशाह छिपे हुए ढंग से फंडों के आवंटन का फैसला करेंगे और ग्राम सभाओं को स्थानीय जरूरतों के आधार पर कामों की योजना बनाने एवं लागू करने संबंधी उनके अधिकारों से वंचित कर दिया जाएगा। मंत्री ने केंद्र द्वारा मनमाने ढंग से गांवों को ए, बी, सी वर्गों में श्रेणीबद्ध करने की चाल को दूसरी ‘छुरी’ करार देते हुए कहा कि इस कदम का उद्देश्य बी एवं सी वर्ग के गांवों को स्कीम से बाहर निकालना है जिससे बहुत सारे लोग गारंटीशुदा रोजगार से वंचित हो जाएंगे। कैबिनेट मंत्री ने केंद्र द्वारा पंजाब को जानबूझकर अनदेखा करने के बारे में कहा, ‘पंजाब को पिछले ढाई से तीन सालों से निर्माण सामग्री की लागत प्रदान नहीं की गई। सामग्री के बिना मजदूर काम कैसे कर सकते हैं? जहां बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाएं आती रहती हैं, वहां रोजगार के दिनों को 100 से बढ़ाकर 150 करना चाहिए, लेकिन पंजाब को मूल रूप से अनदेखा किया गया। हालांकि, बिहार, जहां चुनाव करवाए जाने थे, को इस साल 1,370 करोड़ रुपये के फंड दिए गए।’ उन्होंने जौर देकर कहा कि फंड सिर्फ उन राज्यों को ही दिए जा रहे हैं जहां चुनाव करवाए जाने हैं। अंत में, डॉ. बलबीर सिंह ने ऐतिहासिक किसान आंदोलन के बारे में बात करते हुए कहा, ‘मैं 13 महीने सीमाओं पर बैठा रहा। किसानों ने केंद्र को काले कृषि कानूनों को रद्द करने के लिए मजबूर कर दिया।’ उन्होंने कहा कि बीज बिल एवं बिजली (संशोधन) बिल उसी कड़ी के हिस्से हैं जो गरीबों एवं किसानों को आर्थिक रूप से और भी कमजोर करने के लिए तैयार किए गए हैं। उन्होंने कहा लोगों की जिंदगियों से खेलने वालों को सबक सिखाने का समय आ गया है। उन्होंने कहा, ‘हम उन्हें इन लोक विरोधी नीतियों को वापस लेने के लिए मजबूर करेंगे जैसे कृषि कानून वापस लेने के लिए किया गया था।’