11.2.2026
सोचा दम ले लें ज़रा, बहुत कर लिया शोर।
अभी लगायेंगे पुनः, और ज़ोर से ज़ोर।
और ज़ोर से ज़ोर, अभी तो होगा ड्रामा।
अभी सदन में और, मचाना है हंगामा।
कह साहिल कविराय, गला है हुआ दबोचा।
अब छोड़ेंगे नहीं, यही है हमने सोचा।
प्रस्तुति --- डॉ. राजेन्द्र साहिल