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प्रशासन की आंखों के नीचे रात में नाजायज माइनिंग, अधिकारी रहे नदारद - Uturn Time
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डेराबस्सी के सैदपुरा में अवैध माइनिंग का खेल, प्रशासन की भूमिका सवालों के घेरे में


खेतों के पास जेसीबी से मिट्टी की लूट, प्रशासन की कथित मिलीभगत उजागर



प्रशासन की नाक के नीचे रात के अंधेरे में नाजायज माइनिंग
डेराबस्सी के पास सैदपुरा में खेतों के समीप चार-चार फीट मिट्टी उठाने का आरोप किसान मदन हरिपुर हिंदुआ का गंभीर आरोप, बोले—अधिकारियों की मिलीभगत से चल रहा खेल डेराबस्सी 10 Feb : डेराबस्सी के नजदीकी गांव सैदपुरा में रात के अंधेरे में धड़ल्ले से की जा रही नाजायज माइनिंग ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। गांव के किसान मदन हरिपुर हिंदुआ ने आरोप लगाया है कि उनके खेत के पास बिना किसी सरकारी मंजूरी के जेसीबी, टिप्पर और अन्य भारी वाहनों से अवैध रूप से मिट्टी की खुदाई की जा रही थी। यह कार्रवाई खुलेआम और लगातार कई दिनों से चल रही है, लेकिन संबंधित विभाग के अधिकारी पूरी तरह से नदारद रहे। किसान मदन हरिपुर हिंदुआ ने बताया कि उन्हें किसी व्यक्ति का फोन आया, जिसने सूचना दी कि उनके खेत के पास माइनिंग की जा रही है। जब वह तुरंत मौके पर पहुंचे तो देखा कि जेसीबी मशीन और टिप्पर मिट्टी निकालने में लगे हुए थे। खेत के आसपास चार-चार फीट तक मिट्टी पहले ही निकाली जा चुकी थी, जिससे खेत को भारी नुकसान पहुंचा है। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने मौके पर मौजूद लोगों से पूछा कि आप कौन हैं और आपके पास माइनिंग की अनुमति है या नहीं, तो कोई भी व्यक्ति कोई जवाब नहीं दे सका। इसके बाद सभी वाहन चालक मशीनें स्टार्ट कर वहां से फरार हो गए। इससे साफ जाहिर होता है कि माइनिंग पूरी तरह अवैध थी और कार्रवाई का डर होने पर आरोपी मौके से भाग निकले। मदन हरिपुर हिंदुआ का आरोप है कि माइनिंग किसी डीलर के इशारे पर करवाई जा रही थी, लेकिन उस डीलर के पास न तो कोई सरकारी अनुमति है और न ही निर्धारित क्षेत्र में माइनिंग करने का अधिकार। इसके बावजूद खुलेआम खेतों के पास खुदाई की जा रही थी, जिससे किसानों की जमीन और फसलों को नुकसान पहुंच रहा है। किसान ने बताया कि उन्होंने तुरंत माइनिंग विभाग के अधिकारियों को फोन कर पूरी जानकारी दी, लेकिन काफी देर तक कोई भी अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। इससे किसानों में भारी रोष है। उनका कहना है कि यदि समय रहते अधिकारी मौके पर पहुंचते, तो नाजायज माइनिंग रोकी जा सकती थी। ग्रामीणों का कहना है कि रात के अंधेरे में माइनिंग किए जाने से यह साफ संकेत मिलता है कि सब कुछ प्रशासन की नाक के नीचे और कथित मिलीभगत से हो रहा है। अगर विभागीय अधिकारी ईमानदारी से कार्रवाई करें, तो इस तरह की अवैध गतिविधियां संभव ही नहीं हैं। इस मामले ने एक बार फिर अवैध माइनिंग के खिलाफ प्रशासन की सख्ती के दावों की पोल खोल दी है। किसान और ग्रामीण अब मांग कर रहे हैं कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और अवैध माइनिंग में शामिल लोगों के साथ-साथ लापरवाह अधिकारियों की भी जवाबदेही तय की जाए। कोटस “मेरे खेत के पास बिना किसी मंजूरी के रात के अंधेरे में माइनिंग की जा रही थी। जब परमिशन पूछी तो सभी मशीनें लेकर भाग गए। अधिकारियों को फोन किया, लेकिन कोई नहीं आया। इससे साफ है कि सब कुछ मिलीभगत से हो रहा है।” — मदन हरिपुर हिंदुआ, किसान बॉक्स नाजायज माइनिंग से किसानों को हो रहा नुकसान खेतों की उपजाऊ मिट्टी हो रही बर्बाद चार-चार फीट तक की जा चुकी है खुदाई फसलों और जमीन की संरचना को भारी नुकसान रात के समय माइनिंग से बढ़ रहा हादसों का खतरा प्रशासन की निष्क्रियता से ग्रामीणों में आक्रोश