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लुधियाना सहित कई अन्य शहरों मे इमीग्रेशन स्कैम: आलीशान महलों और रसूख की आड़ में पंजाब की जवानी का 'व्यवस्थित कत्ल' - Uturn Time
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दो पहिया से लग्जरी गाड़ियों तक का 'खूनी' सफर; ₹10 लाख की कानूनी धमकी और मनी लॉन्ड्रिंग के काले साम्राज्य का पर्दाफाश
​कानूनी माहिरों से बातचीत करके पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में जनहित याचिका का दायर की जाएगी
पंजाब, जिसे कभी पांच दरियाओं की धरती कहा जाता था, आज वहां 'इमीग्रेशन' के नाम पर ठगी का एक छठा दरिया बह रहा है। वरिष्ठ पत्रकार राजेश कोछड़ लुधियाना - पंजाब, जिसे कभी पांच दरियाओं की धरती कहा जाता था, आज वहां 'इमीग्रेशन' के नाम पर ठगी का एक छठा दरिया बह रहा है। लुधियाना की जगमगाती सड़कों पर बने आलीशान इमीग्रेशन दफ्तर आज उन हजारों युवाओं की उम्मीदों की कब्रगाह बन चुके हैं, जो विदेश जाने का सपना संजोए यहां आते हैं। यह मामला अब महज धोखाधड़ी का नहीं, बल्कि करोड़ों रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग, आपराधिक सिंडिकेट और मानसिक शोषण का एक भयावह जाल है। ​■ ईमानदार कारोबारियों की साख पर लगा रहे बट्टा ​यहाँ यह गौर करना आवश्यक है कि इन 'काली भेड़ों' की वजह से उन ईमानदार इमीग्रेशन संचालकों पर भी बेहद बुरा असर पड़ता है जो कानून के दायरे में रहकर सही तरीके से काम कर रहे हैं। इन ठगों के कारनामों के कारण जनता का विश्वास पूरे सेक्टर से उठने लगा है, जिससे वैध व्यवसाय करने वाले प्रोफेशनल भी शक के घेरे में आ जाते हैं। ​■ फर्श से अर्श तक: ठगी की कमाई से खड़ा किया लग्जरी साम्राज्य ​इस सिंडिकेट की सबसे बड़ी पहचान संचालकों का रहस्यमयी आर्थिक उत्थान है। महज 5-7 साल पहले तक जो संचालक साधारण दो पहिया वाहनों पर घूमते थे, आज वे शहर की सबसे महंगी लोकेशंस पर करोड़ों के दफ्तरों में बैठते हैं। इनके पास लग्जरी गाड़ियों का काफिला है। साफ़ है कि यह संपत्ति युवाओं के खून-पसीने की कमाई को लूटकर बनाई गई है। ​■ 'प्राइवेट लिमिटेड' का मुखौटा: कानून से बचने की ढाल ​ठगों ने अपनी व्यक्तिगत जिम्मेदारी से बचने के लिए अपनी छोटी फर्मों को 'प्राइवेट लिमिटेड' कंपनियों में बदल लिया है। इस 'कॉर्पोरेट कवच' का उपयोग वे जांच एजेंसियों को कागजी उलझनों में फंसाने और कानूनी प्रक्रियाओं को लंबा खींचने के लिए करते हैं। एक-एक संचालक ने अलग-अलग नामों से कई फर्में खोल रखी हैं। ​■ खाली कागजों का 'डेथ वारंट' और ₹10 लाख की फिरौती ​इन सेंटरों के भीतर जो 'एग्रीमेंट' होता है, वह असल में पीड़ित का 'डेथ वारंट' होता है। फाइल जमा करने के बहाने और विदेशों में आपने वकीलों के अनुसार कागज तैयार करने की बात कह कर वीजा लगाने वालों से खाली कागजों और कोरे स्टांप पेपरों पर हस्ताक्षर करवा लिए जाते हैं। वीज़ा न लगने पर जब कोई पैसा वापस मांगता है, तो इन्हीं कागजों पर अपने बचाव अनुसार बनाकर करके यह शर्त डाल दी जाती है कि—"यदि ग्राहक ने कानूनी कार्रवाई की या सोशल मीडिया पर राज उजागर किया, तो उसे ₹10 लाख का जुर्माना देना होगा।" यह केवल पीड़ितों का मुंह बंद रखने का और और सोशल मीडिया पर अपने बदनामी के डर से अपना बचाव करने का एक जरिया है। मनी लॉन्ड्रिंग और नकद (Cash) लेनदेन का विशाल स्कैम ​आयकर नियमों के अनुसार 20,000 रुपये से अधिक का नकद लेनदेन वर्जित है। लेकिन ये सेंटर अपने फर्जी कागजात में लाखों रुपये का लेनदेन 'नकद' दिखा देते हैं। यह साफ़ तौर पर मनी लॉन्ड्रिंग का प्रयास है। खुद को बचाने की हड़बड़ी में ये संचालक कागजों में अक्सर ऐसी विसंगतियां छोड़ देते हैं, जो इनके अपराध का पुख्ता सबूत हैं। ​■ आपराधिक पृष्ठभूमि और पुलिसिया सांठगांठ का 'अंधेरा' ​सूत्रों के अनुसार कुछ इमीग्रेशन संचालकों की पारिवारिक पृष्ठभूमि आपराधिक (Criminal Background) वाली है। फेसबुक पर रिवॉल्वर के साथ तस्वीरें डालकर ये दहशत फैलाते हैं। सूत्रों प्राप्त जानकारी के और ‌पीड़ितों के आरोप अनुसार इन ठगों की पुलिस के कुछ हिस्सों के साथ 'बिजली' जैसी तीव्र और गहरी सांठगांठ है, जिसके दम पर ये सरेआम चुनौती देते हैं—"जो करना है कर लो, सिस्टम हमारी जेब में है।" ​■ किसान संगठनों का मोर्चा और प्रशासन की खामोशी ​लुधियाना व अपने शहरों में आए दिन इन सेंटरों के विरुद्ध धरने-प्रदर्शनों की खबरें आम हैं। समाजसेवी लोग व संगठन , किसान जत्थेबंदियां लगातार मोर्चा खोले हुए हैं। इसके बावजूद यह धंधा न रुकना एक गहन विषय है। इतने भारी जन-रोष के बाद भी प्रशासन की खामोशी कई गंभीर सवाल खड़े करती है। ​■ मानसिक कत्ल की जिम्मेदारी कौन लेगा? ​पंजाब का युवा जमीन गिरवी रखकर या भारी ब्याज पर बड़ी रकम लेकर इन एजेंटों को देता है। जब पैसा डूब जाता है और एजेंट धमकियां देते हैं, तो युवा आत्महत्या जैसा कदम उठा लेते हैं। यह रिपोर्ट उन लोगों के लिए एक अलार्म है, जो इस माफिया को संरक्षण दे रहे हैं। पिछले समय में यह भी देखने में आया है कि जिन लोगों ने इन गलत इमीग्रेशन वालों के विरुद्ध आवाज उठाने की कोशिश की है। गलत काम करने वाले इमीग्रेशन वालों ने पैसे के दम पर उनकी आवाज को दबाने के लिए उन पर झूठे मुकदमे भी दर्ज करवाने‌ के प्रयास रहते हैं। कुछ समाजसेवी ने कहा कि जल्द ही गलत इमीग्रेशन का काम करने वालों‌ के विरुद्ध कानूनी माहिरों से बातचीत करके पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में जनहित याचिका का दायर की जाएगी ।