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नई दिल्ली 08 FEB। रेजिडेंशियल रियल एस्टेट बाजार में तेजी के बाद अब सुस्ती के संकेत मिलने लगे हैं। लगातार बढ़ी कीमतों के कारण बड़ी संख्या में घर खरीदारों का बजट बिगड़ गया है, जिससे कई शहरों में बुकिंग और साइट विजिट दोनों में गिरावट दर्ज की जा रही है। रियल एस्टेट कंसल्टेंट्स के अनुसार 2024 में प्रॉपर्टी रेट्स में तेज उछाल देखने को मिला। प्रमुख मेट्रो और टियर-2 शहरों में घरों के दाम औसतन 20 से 30 प्रतिशत तक बढ़े। निर्माण लागत, जमीन की कीमतें और फाइनेंसिंग कॉस्ट बढ़ने से बिल्डरों ने प्राइस बढ़ाई, जिसका सीधा असर एंड-यूजर डिमांड पर पड़ा। डेटा के मुताबिक जिन यूनिट्स की कीमत 2023 में 60–70 लाख रुपये थी, वही 2025 की शुरुआत तक 90 लाख से 1 करोड़ रुपये तक पहुंच गईं। इसके चलते मिडिल-इनकम खरीदार बाजार से बाहर होते नजर आ रहे हैं। इंडस्ट्री सूत्र बताते हैं कि जनवरी 2026 में कई शहरों में नई बुकिंग में पिछली तिमाही के मुकाबले 10 से 15 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। वहीं अनसोल्ड इन्वेंट्री बढ़ रही है, जिससे डेवलपर्स अब नई लॉन्चिंग धीमी कर रहे हैं और मौजूदा स्टॉक निकालने पर फोकस कर रहे हैं। बिल्डर अब डिस्काउंट, सबवेंशन स्कीम और फ्लेक्सिबल पेमेंट प्लान दोबारा पेश कर रहे हैं ताकि डिमांड को सपोर्ट मिल सके। विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा हालात में बाजार में बड़ी गिरावट की संभावना कम है, लेकिन कीमतों में तेजी का दौर फिलहाल थम सकता है। आने वाले महीनों में रियल एस्टेट सेक्टर स्टेबलाइजेशन फेज में रहने की उम्मीद है।