लुधियाना कारपोरेशन में कूड़ा में बड़ा खेल करने की तैयारी
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हजारों निगम सफाई कर्मी बेरोजगार होने की आशंका
राजदीप सिंह सैनी
लुधियाना/यूटर्न/8 फरवरी। लुधियाना कारपोरेशन में कूड़ा घरों से उठाने, लिफ्टिंग और प्रोसेसिंग के टेंडर लगाकर बड़ा खेल करने की तैयारी करने की चर्चाएं सामने आई है। चर्चा है कि निगम द्वारा इस पूरे प्रोसेस के लिए एक एस्टिमेंट तैयार किया गया है। जिसे पास करने की तैयारी भी कर ली गई है। इस संबंधी करीब 1150 करोड़ रुपए का टेंडर लगाने का एस्टिमेंट बनाया है। यह टेंडर मौजूदा कूड़ा लिफ्टिंग व प्रोसेसिंग टेंडरों के मुकाबले दो से तीन गुना ज्यादा कीमत के हिसाब से बना है। जिससे टेंडर लेने वाले ठेकेदार को मालामाल करने की तैयारी है। चर्चा है कि इस टेंडर में कई अफसरों और राजनेताओं की मिलीभगत है। जिसके चलते अब जनता द्वारा टैक्स के जरिए दिया जाने वाला पैसा जमकर बर्बाद किया जाएगा। सोमवार तीन बजे पंजाबी भवन में निगम हाउस की मीटिंग आयोजित की जा रही है। मीटिंग में कूड़े के इस टेंडर का प्रस्ताव पास करने के लिए हाउस के आगे रखा जाएगा। इससा जहां करोड़ों रुपए का खेल होगा, वहीं घरों से कूड़ा उठाने वाले निगम मुलाजिम भी बेरोजगार हो जाएंगे।
आठ साल के लिए लगेगा टेंडर
चर्चा है कि निगम अधिकारियों द्वारा 1150 करोड़ रुपए का टेंडर एस्टिमेंट बनाया गया है। जिसमें टेंडर लेने वाली कंपनी घरों से कूड़ा उठाएगी, फिर उसे लिफ्टिंग कर डंप तक पहुंचाएगी और आगे प्रोसेसिंग भी करेगी। इस पूरे कार्य के लिए एक ही कंपनी को टेंडर दिया जाएगा। एस्टिमेंट मुताबिक आठ साल के लिए टेंडर दिया जाएगा और 170 करोड़ रुपए प्रति साल खर्च होंगे। इस टेंडर के मुताबिक निगम ठेकेदार को 3300 रुपए प्रति टन पेमेंट अदा करेगी।
तीन गुना ज्यादा पैसा खर्च करने की तैयारी
मौजूदा समय में प्यारा सिंह एंड कंपनी द्वारा कांपेक्टरों से कूड़ा उठाकर डंप पर गिराया जाता है। जिसके लिए निगम उसे 300 रुपए प्रति टन के हिसाब से पेमेंट देती है। वहीं डंप से कूड़ा प्रोसेसिंग का काम ग्रीनटेक एनवायरनमेंट कंपनी कर रही है। जिसे 690 रुपए प्रति टन मुताबिक पेमेंट दी जाती है। दोनों का मिलाकर 990 रुपए हुए। वहीं घरों से कूड़ा उठाने के लिए अपनी तरफ से 400 रुपए प्रति टन भी जोड़ लें तो भी 1390 रुपए बने। लेकिन अब जो नया टेंडर लगाया जा रहा है, उसमें 3300 रुपए प्रति टन के हिसाब से पैसे दिए जाने है। यानि कि निगम मौजूदा टेंडरों के मुकाबले दो से तीन गुना ज्यादा पैसा खर्च करके जनता के पैसों की बर्बादी करेगा।
घरों से कूड़ा उठाने वाले कर्मी होंगे बेरोजगार
वहीं इस टेंडर के बाद घरों से कूड़ा उठाने वाले कर्मी भी बेरोजगार होने की आशंका है। वहीं निगम अधिकारियों ने एस्टिमेंट तो बना लिया, लेकिन उसमें यह नहीं लिखा कि घरों से होने वाली कलेक्शन निगम करेगा या ठेका लेने वाली कंपनी करेगी। कलेक्शन के लिए बाद में देखने की बात लिखी गई है। वहीं अगर यह कलेक्शन भी ठेकेदार करेगा, तो उसकी चांदी नहीं सोना बन जाएगा। क्योंकि इससे लाखों रुपए कलेक्शन प्रति एरिया होती है।
अगर पहले ठेके गलत, तो इसका जिम्मेदार कौन
लुधियाना शहर स्वच्छता के मामले में पिछड़ चुका है। अगर अधिकारी मौजूदा ठेकों से खुश नहीं हैं, तो इसके पीछे आखिर जिम्मेदार कौन है। चर्चा है कि इन कंपनियों को ठेका देने वाले अफसरों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं चर्चा है कि अगर मौजूदा ठेकेदार सही से काम नहीं कर रहे तो क्या गारंटी है कि नया ठेकेदार सही से काम करेगा। चर्चा है कि अगर टेंडर अलॉट करने वाले निगम अधिकारी लिखित में इसकी गारंटी देने के लिए तैयार हैं, फिर तो ठीक है।
इंदौर में कूड़ा उठाने के निगम को मिलती है पेमेंट
लुधियाना में जहां कूड़ा लिफ्टिंग और प्रोसेसिंग के लिए करोड़ों रुपए बर्बाद किए जा रहे हैं। वहीं इंदौर में कूड़े का टेंडर लेने वाली कंपनियों द्वारा उल्ट इंदौर कारपोरेशन को पैसा दिया जाता है। क्योंकि ठेकेदारों द्वारा कूड़े से गैस, प्लास्टिक और खाद बनाई जाती है। जिससे उन्हें काफी मुनाफा होता है। लेकिन दूसरी तरफ लुधियाना कारपोरेशन के कुछ अधिकारी व राजनेता सिर्फ कमाई के चक्कर में टेंडर देने की ही बात पर अड़े रहते हैं। कोई भी बात होने पर उसे विचारने की जगह सीधा करोड़ों का एस्टिमेंट बनाकर टेंडर लगाने की तैयार कर ली जाती है।
आर्बिट्रेशन में करोड़ों रुपए गंवा सकती है कारपोरेशन
वहीं, बता दें कि मौजूदा कूड़ा लिफ्टिंग व प्रोसेसिंग करने वाली कंपनियां प्यारा सिंह एंड कंपनी और ग्रीनटेक एनवायरनमेंट कंपनी का ठेका 2028 तक का है। अगर निगम नई कंपनी को ठेका देगी तो इन पुरानी कंपनियों को बाहर करना होगा। चर्चा है कि अगर निगम इन कंपनियों के टेंडर बीच में रद्द करते हुए खत्म करती है, तो कंपनियां आर्बिट्रेशन में जा सकती है। जिसके चलते निगम को आर्बिट्रेशन में करोड़ों रुपए का नुकसान हो सकता है।
विपक्ष आखिर क्यों शांत ?
वहीं शहर में चर्चा है कि लुधियाना कारपोरेशन में विपक्ष काफी मजबूत है, फिर चाहे वे कांग्रेस या बीजेपी क्यों न हो। लेकिन फिर भी विपक्ष द्वारा जनता के बर्बाद हो रहे करोड़ों रुपए को लेकर आवाज नहीं बुलंद की जाती। अब देखना होगा कि सोमवार को होने वाली हाउस की मीटिंग में क्या विपक्षी लीडर जनता के पैसों की बर्बादी रोक सकेगें या नहीं।
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