श्री शिव पुराण कथा में आचार्य हरिकृष्ण महाराज ने श्रद्धालुओं को भगवान शिव की आराधना और मन की पवित्रता का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि श्रद्धा से शिव का अभिषेक करने पर जीवन में शुभ फल प्राप्त होते हैं। कथा के बाद विधिवत आरती हुई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। आयोजक एस.एस. खुराना ने कहा कि धार्मिक आयोजन समाज में आध्यात्मिक वातावरण और संस्कारों को बढ़ावा देते हैं।
लुधियाना : सिविल लाइंस स्थित श्री दंडी स्वामी तपोवन तपोभूमि आश्रम में अंसल एस्टेट के एस.एस. खुराना की ओर से आयोजित सात दिवसीय श्री शिव पुराण कथा के तीसरे दिन मंगलवार को श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से कथा का श्रवण किया। इस दौरान पूरा आश्रम भगवान शिव के जयकारों से गूंज उठा।हरिद्वार से पधारे कथा व्यास आचार्य श्री हरिकृष्ण जी महाराज ने भगवान शिव की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने घर या मंदिर में भगवान शंकर की स्थापना कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना करनी चाहिए।
सच्चे मन और श्रद्धाभाव से भगवान शिव का अभिषेक करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और शुभ फल की प्राप्ति होती है।उन्होंने कहा कि भगवान शिव की पूजा मनुष्य जब चाहे कर सकता है, लेकिन उनकी पूजा का मूल समय चार पहर की पूजा है, जो विशेष रूप से महाशिवरात्रि के अवसर पर की जाती है। उन्होंने कहा कि मनुष्य द्वारा कहीं भी किया गया पाप नष्ट या माफ हो सकता है, लेकिन तीर्थ स्थान पर किया गया पाप कभी माफ नहीं होता।
आचार्य हरिकृष्ण महाराज ने कहा कि मनुष्य के पवित्र मन से बड़ा कोई तीर्थ स्थान नहीं है।धार्मिक कार्यों और पूजा-पाठ का वास्तविक उद्देश्य मन को पवित्र करना है। उन्होंने श्रद्धालुओं से कहा कि अपने मन को कमजोर समझने की भूल नहीं करनी चाहिए, क्योंकि मन बहुत बलवान होने के साथ-साथ बुद्धिमान भी है।
एस.एस. खुराना ने कथा में पहुंचे श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे धार्मिक आयोजनों से समाज में आध्यात्मिक वातावरण का निर्माण होता है और लोगों को धर्म एवं संस्कारों से जुड़ने की प्रेरणा मिलती है।कथा के उपरांत तपोस्थली मंदिर के पं. संतोष त्रिपाठी, पं. महानंद शर्मा, पं. दिनेश चंद्र, पं. संदीप एवं पं. यतेन्द्र ने विधिवत आरती करवाई। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने आरती में भाग लेकर भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त किया।खुराना ने बताया कि श्री शिव पुराण कथा का आयोजन 15 अगस्त तक प्रतिदिन शाम 4 बजे से 7:30 बजे तक किया जाएगा। 16 अगस्त को हवन एवं भंडारे के साथ कथा का समापन होगा।