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New Delhi: मलक्का पर भारत की रणनीतिक चाल, इंडोनेशिया के सबांग पोर्ट से हिंद महासागर में बढ़ेगी पकड़ - Uturn Time
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ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट के साथ बनेगा नया समुद्री शक्ति केंद्र, चीन की 'मलक्का दुविधा' और 'स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स' रणनीति को मिल सकती है चुनौती
नई दिल्ली (Narendra Singh Danu) : हिंद महासागर और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अपनी रणनीतिक मौजूदगी मजबूत करने की दिशा में भारत ने बड़ा कदम उठाया है। भारत और इंडोनेशिया ने मलक्का जलडमरूमध्य (Strait of Malacca) के प्रवेश द्वार पर स्थित सबांग पोर्ट के संयुक्त विकास पर सहमति जताई है। इस परियोजना को भारत के ग्रेट निकोबार ट्रांस-शिपमेंट पोर्ट प्रोजेक्ट के साथ जोड़कर देखा जा रहा है, जिससे मलक्का जलडमरूमध्य के दोनों सिरों पर भारत की रणनीतिक पहुंच मजबूत हो सकती है। सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इंडोनेशिया यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच इस सहयोग को लेकर महत्वपूर्ण सहमति बनी। सबांग बंदरगाह इंडोनेशिया के आचेह प्रांत में स्थित है और भारत के इंदिरा पॉइंट से इसकी दूरी करीब 100 समुद्री मील है। यह स्थान दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापारिक मार्गों में शामिल मलक्का जलडमरूमध्य के पश्चिमी मुहाने पर स्थित है। दुनिया के व्यापार की अहम धुरी है मलक्का जलडमरूमध्य मलक्का जलडमरूमध्य हिंद महासागर को दक्षिण चीन सागर से जोड़ता है और इसे वैश्विक समुद्री व्यापार की सबसे महत्वपूर्ण लाइफलाइन माना जाता है। दुनिया के लगभग एक-चौथाई समुद्री व्यापार और पश्चिम एशिया से पूर्वी एशिया जाने वाले तेल एवं गैस का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है। हर वर्ष करीब 2.8 ट्रिलियन डॉलर मूल्य का माल इस समुद्री रास्ते से परिवहन होता है। भारत के लिए क्यों है अहम भारत का पूर्वी एशिया—जापान, दक्षिण कोरिया, चीन और आसियान देशों—के साथ होने वाला बड़ा व्यापार इसी समुद्री मार्ग पर निर्भर है। पेट्रोलियम उत्पाद, कोयला, मशीनरी और कंटेनर कार्गो के आवागमन के लिए यह भारत की प्रमुख समुद्री लाइनों में शामिल है। वहीं, 'एक्ट ईस्ट पॉलिसी' के तहत दक्षिण-पूर्व एशिया से संपर्क बढ़ाने में भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। चीन की रणनीति पर पड़ सकता है असर चीन की ऊर्जा आपूर्ति और निर्यात का बड़ा हिस्सा भी मलक्का जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। पूर्व चीनी राष्ट्रपति हू जिंताओ ने 2003 में इसे चीन की "मलक्का दुविधा" बताया था और कहा था कि किसी संघर्ष की स्थिति में यह मार्ग बाधित होने पर चीन की अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि सबांग पोर्ट में भारत की भागीदारी और ग्रेट निकोबार परियोजना के विकसित होने से भारत को मलक्का जलडमरूमध्य के दोनों ओर रणनीतिक उपस्थिति मिलेगी। इससे हिंद महासागर में समुद्री सुरक्षा, व्यापारिक गतिविधियों और निगरानी क्षमता को मजबूती मिलने के साथ क्षेत्रीय शक्ति संतुलन में भी भारत की भूमिका और प्रभाव बढ़ सकता है। 'स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स' का जवाब माना जा रहा कदम विशेषज्ञ इस परियोजना को चीन की 'बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव' और 'स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स' रणनीति के जवाब के रूप में भी देख रहे हैं। चीन ने पाकिस्तान के ग्वादर, श्रीलंका के हम्बनटोटा और म्यांमार के क्याउकफ्यू जैसे बंदरगाहों में निवेश कर हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी समुद्री उपस्थिति बढ़ाई है। ऐसे में सबांग पोर्ट और ग्रेट निकोबार परियोजना भारत को इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अपनी रणनीतिक स्थिति मजबूत करने और समुद्री हितों की रक्षा करने में महत्वपूर्ण बढ़त दिला सकती है।