चंडीगढ़/यूटर्न/ 14 मार्च।ट्राइसिटी में एलपीजी गैस की किल्लत का असर अब अस्पतालों तक पहुंच गया है। शहर के प्रमुख अस्पताल पीजीआई की ओपीडी कैंटीन में वीरवार को गैस खत्म होने के कारण करीब दो घंटे तक खाना नहीं बन पाया, जिससे मरीजों और उनके तीमारदारों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
कैंटीन संचालकों के अनुसार शनिवार को दो सिलिंडर मिलने के बाद सीमित मेन्यू के साथ काम दोबारा शुरू किया गया। फिलहाल तेज आंच पर बनने वाले कई व्यंजन जैसे छोले-भटूरे, डोसा और अन्य स्नैक्स अस्थायी रूप से बंद कर दिए गए हैं।
गैस की कमी का असर शहर के अन्य अस्पतालों में भी दिखाई दे रहा है। जीएमसीएच-32 और जीएमएसएच-16 की कैंटीनों में भी एलपीजी की कमी के चलते मेन्यू सीमित करना पड़ा है। वहीं जीएमसीएच-32 की कैंटीन में भोजन तैयार करने के लिए तंदूर, लकड़ी और इंडक्शन चूल्हों का सहारा लिया जा रहा है।
पीजीआई की मुख्य आहार विशेषज्ञ डॉ. नैन्सी साहनी ने बताया कि संस्थान में भर्ती मरीजों के भोजन पर फिलहाल कोई असर नहीं पड़ा है। पीजीआई में प्रतिदिन करीब 2000 मरीजों के लिए भोजन तैयार किया जाता है और तीन समय मिलाकर लगभग 6000 भोजन बनाए जाते हैं।
पीजीआई के डॉक्टरों की कैंटीन के ठेकेदार जीजी कुमार के मुताबिक पिछले तीन-चार दिनों से परिसर में एलपीजी का स्टॉक खत्म हो गया था। रोजाना लगभग 200 लोग इस कैंटीन में भोजन करते हैं, लेकिन गैस की कमी के कारण फास्ट फूड तैयार करना मुश्किल हो गया है और फिलहाल इंडक्शन चूल्हों के जरिए काम चलाया जा रहा है।
गैस संकट का असर अस्पतालों के बाहर लगने वाले लंगरों पर भी पड़ा है। जीएमसीएच-32 और जीएमएसएच-16 के बाहर शुक्रवार को कोई लंगर नहीं लगा, जबकि पीजीआई में केवल लकड़ी पर बनने वाला एक लंगर ही लगाया गया। इस बीच रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन ने एलपीजी एजेंसियों को पत्र लिखकर अस्पताल की कैंटीनों को प्राथमिकता के आधार पर गैस उपलब्ध कराने की मांग की है।
उधर, ट्राइसिटी के ढाबों और रेस्टोरेंट्स पर भी गैस किल्लत का असर साफ दिखाई दे रहा है। कई जगह लकड़ी और कोयले की भट्ठियों पर खाना बनाया जा रहा है और कई रेस्टोरेंट्स ने मेन्यू छोटा कर दिया है। कारोबारियों का कहना है कि गैस संकट के कारण उनका कारोबार करीब 50 प्रतिशत तक प्रभावित हुआ है।
प्रशासन और गैस एजेंसियों के अनुसार शहर में रोजाना करीब 12,800 घरेलू सिलिंडर की खपत होती है, लेकिन फिलहाल केवल 30 से 40 प्रतिशत ही सप्लाई मिल पा रही है। वहीं कॉमर्शियल सिलिंडर की सप्लाई लगभग ठप हो चुकी है।
मोहाली में स्थिति और गंभीर हो गई है, जहां गैस की कमी के चलते सिलिंडर ब्लैक में बिकने की शिकायतें सामने आ रही हैं। रेस्टोरेंट संचालकों के अनुसार जो सिलिंडर पहले करीब 1100 रुपये में मिलता था, वह अब 2500 रुपये तक में खरीदना पड़ रहा है।
वहीं पंचकूला में भी कॉमर्शियल गैस सिलिंडर की सप्लाई लगभग बंद हो गई है। कई रेस्टोरेंट और कैटरिंग संचालकों ने नए ऑर्डर लेना बंद कर दिया है। कारोबारियों का कहना है कि यदि जल्द सप्लाई बहाल नहीं हुई तो कई आउटलेट बंद करने की नौबत आ सकती है।