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लुधियाना 02 मार्च । चैंबर ऑफ इंडस्ट्रियल एंड कमर्शियल अंडरटेकिंग्स (CICU) ने आज मध्य पूर्व में अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इसका सीधा और गंभीर प्रभाव भारत के निर्यात-उन्मुख औद्योगिक क्लस्टरों, विशेषकर एमएसएमई आधारित वस्त्र, इंजीनियरिंग और संबद्ध क्षेत्रों पर पड़ रहा है। वित्त मंत्रालय, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय तथा वस्त्र मंत्रालय को भेजे गए एक तात्कालिक ज्ञापन में CICU ने मांग की है कि मध्य पूर्वी बाजारों में निर्यात करने वाले उद्योगों को आयकर अधिनियम की धारा 43B (h) के प्रावधानों से तत्काल छूट दी जाए। संस्था का कहना है कि युद्ध के कारण शिपिंग, लॉजिस्टिक्स और भुगतान चक्र बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। हालिया घटनाक्रम में अमेरिकी और इज़राइली सैन्य कार्रवाई तथा ईरान की जवाबी कार्रवाई के चलते होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण वैश्विक व्यापार मार्ग प्रभावित हुए हैं, जहां से विश्व के लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल और ऊर्जा आपूर्ति का आवागमन होता है। इसके चलते खाड़ी के प्रमुख बंदरगाहों, विशेषकर जेबेल अली, में भारी देरी और जाम की स्थिति बनी हुई है। बीमा कंपनियों द्वारा ‘वॉर-रिस्क प्रीमियम’ बढ़ाने से भी निर्यातकों पर अतिरिक्त बोझ पड़ा है। CICU के अध्यक्ष श्री उपकार सिंह आहूजा ने कहा, “समुद्री मार्गों में व्यवधान और लॉजिस्टिक्स की अनिश्चितता के कारण घरेलू एमएसएमई आपूर्तिकर्ताओं को 45 दिनों के भीतर भुगतान करना संभव नहीं रह गया है, जबकि विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के तहत निर्यात प्राप्ति की समयसीमा 15 माह तक हो सकती है। ऐसे में धारा 43B (h) के प्रावधान निर्यातकों के लिए दंडात्मक साबित हो रहे हैं।” उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि घरेलू भुगतान नियमों को FEMA के निर्यात प्राप्ति प्रावधानों के अनुरूप बनाया जाए तथा वर्तमान भू-राजनीतिक संकट से प्रभावित निर्यातकों को धारा 43B (h) से स्थायी छूट प्रदान की जाए। गौरतलब है कि RBI और FEMA नियमों के तहत निर्यातकों को निर्यात राशि प्राप्त करने के लिए सामान्यतः 15 माह तक का समय दिया जाता है, जबकि आयकर अधिनियम की धारा 43B (h) के अनुसार 45 दिन से अधिक देरी से किए गए भुगतान को कर कटौती में मान्य नहीं माना जाता। CICU का कहना है कि वैश्विक परिस्थितियों से उत्पन्न इस असाधारण संकट में उद्योगों को त्वरित राहत देना समय की मांग है।