चंडीगढ़/यूटर्न/12 जून। हरियाणा का महत्वाकांक्षी 'ग्लोबल सिटी' प्रोजेक्ट भारत की स्काईलाइन (शहर के क्षितिज) को बदल सकता है। इसके तहत गुरुग्राम में एक बहुत ऊंचा (सुपरटॉल) मिक्स्ड-यूज़ टावर बनाया जाएगा, जो दुनिया की सबसे ऊंची इमारतों में शामिल होगा। हरियाणा राज्य औद्योगिक और बुनियादी ढांचा विकास निगम (एचएसआईआईडीसी) ने द्वारका एक्सप्रेसवे के किनारे प्रस्तावित 1,000 एकड़ की 'ग्लोबल सिटी' में 6.7 एकड़ की जगह चुनी है। यहां एक गगनचुंबी इमारत बनाने की योजना है, जिसकी ऊंचाई 620 से 700 मीटर के बीच हो सकती है। अगर यह बन जाता है, तो यह टावर काफी बड़े अंतर से भारत की सबसे ऊंची इमारत बन जाएगा। हालांकि, यह प्रस्तावित इमारत दुबई के मशहूर बुर्ज खलीफा (जो 828 मीटर ऊंचा है और अभी दुनिया की सबसे ऊंची पूरी हो चुकी इमारत है) से छोटी होगी, लेकिन यह गुरुग्राम को उन चुनिंदा शहरों की सूची में शामिल कर देगी जहां 600 मीटर से ऊंची गगनचुंबी इमारतें हैं।
मिक्स्ड-यूज़ डेवलपमेंट का प्लान
इस टावर को मिक्स्ड-यूज़ डेवलपमेंट के तौर पर प्लान किया गया है। इसमें प्रीमियम ऑफिस स्पेस, लग्जरी घर, एक होटल, रिटेल आउटलेट और एक पब्लिक ऑब्जर्वेशन डेक होगा, जहां से नेशनल कैपिटल रीजन का शानदार नज़ारा दिखेगा। हरियाणा सरकार ने इस प्रोजेक्ट के लिए जगह तय कर दी है, हालांकि इसकी विस्तृत जानकारी और अंतिम योजना की घोषणा अभी बाकी है।
ग्लोबल सिटी' प्रोजेक्ट का हिस्सा है इमारत
यह प्रस्तावित गगनचुंबी इमारत राज्य सरकार के प्रमुख 'ग्लोबल सिटी' प्रोजेक्ट का हिस्सा है, जिसे एचएसआईआईडीसी विकसित कर रहा है। द्वारका एक्सप्रेसवे के पास लगभग 1,000 एकड़ में फैला यह इंटीग्रेटेड अर्बन हब बिजनेस, कमर्शियल, रेजिडेंशियल और इंस्टीट्यूशनल गतिविधियों का केंद्र होगा। इसे मल्टीनेशनल कंपनियों, फाइनेंशियल संस्थानों और टेक्नोलॉजी फर्मों को आकर्षित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
एनसीआर की इमारतें होगी बौनी
अगर यह प्रोजेक्ट पूरा हो जाता है, तो यह टावर एनसीआर में मौजूद मौजूदा ऊंची इमारतों को बौना साबित कर देगा। तुलना के लिए देखें तो नोएडा में सुपरनोवा की ऊंचाई 300 मीटर है, गुरुग्राम में ट्रंप टावर्स 198.84 मीटर ऊंचे हैं, दिल्ली में लीला स्काई विला 190 मीटर ऊंचे हैं और गुरुग्राम में रहेजा रेवांता की ऊंचाई 199.7 मीटर है। फिलहाल भारत की सबसे ऊंची इमारत मुंबई में 320 मीटर ऊंचा 'पैलेस रॉयल' है।
प्रोजेक्ट का मास्टर प्लान तैयार
अधिकारियों ने बताया कि हरियाणा सरकार ने प्रोजेक्ट का मास्टर प्लान तैयार करते समय पिछले दो-तीन वर्षों में एनसीआर, बेंगलुरु और मुंबई के प्रमुख डेवलपर्स से सलाह-मशविरा किया है। हालांकि, यह प्रस्ताव अभी भी प्लानिंग और 'रिक्वेस्ट-फॉर-प्रपोज़ल' (आरएफपी) के चरण में ही है; इसके लिए अभी कंसल्टेंट्स की नियुक्ति होनी बाकी है और बोली लगाने की प्रक्रिया भी शुरू नहीं हुई है।
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