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फर्जी अरेस्ट वारंट व वीड़ियो कॉल पर रची साजिश, बैंक खातों का उपयोग मनी लॉन्ड्रिंग, ड्रग्स तस्करी में प्रयोग का दिखाया था ड़र आरोपी के खाते में फ्रॉड की 2 लाख 10 हजार रकम पाई गई, 3 दिन के पुलिस रिमांड के दौरान आरोपी से पूछताछ जारी पंचकूला : पंचकूला में साइबर अपराधियों द्वारा कानून प्रवर्तन एजेंसियों के नाम का दुरुपयोग कर आमजन को डराने–धमकाने का एक मामले में ठगो ने खुद को मुंबई साइबर सेल, क्राइम ब्रांच और सीबीआई से जुड़ा अधिकारी बताकर फर्जी समन, अरेस्ट वारंट और वीडियो कॉल के जरिए पीड़ित को मानसिक दबाव में लिया और बैंक खातों की स्क्रीन शेयरिंग करवा कर लाखों रुपये की धोखाधड़ी को अंजाम दिया। पंचकूला निवासी शिकायतकर्ता ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि 18 दिसंबर को उसे एक कॉल प्राप्त हुआ। कॉलर ने खुद को मुंबई साइबर सेल में तैनात हेड कॉन्स्टेबल बताते हुए कहा कि शिकायतकर्ता की आईडी से 21 फर्जी बैंक खाते खुले हुए हैं, जिनका उपयोग मनी लॉन्ड्रिंग, ड्रग्स तस्करी में प्रयोग किया गया है तथा 25 लाख रुपये के गबन का आरोप लगाया। इसके बाद कॉल को अन्य कथित साइबर सेल अधिकारी को ट्रांसफर किया गया, जिसने स्काइप पर वीडियो कॉल के माध्यम से शिकायतकर्ता को जोड़ा। ठगों ने मुंबई क्राइम ब्रांच व सीबीआई के नाम से फर्जी अरेस्ट वारंट भेजा और स्क्रीन शेयरिंग करवा कर सभी खातों की जांच के बहाने कुल 7 लाख 31 हजार रुपये की ठगी कर ली। डीसीपी क्राइम एंड ट्रैफिक मनप्रीत सिंह सूदन ने बताया कि शिकायत के आधार पर 26 दिसंबर को साइबर क्राइम थाना पंचकूला में भारतीय न्याय संहिता की धारा 316(2), 318(4), 319(2) के तहत मामला दर्ज किया गया। मामले की जांच साइबर थाना प्रभारी युद्धवीर सिंह के नेतृत्व में जांच अधिकारी अभिषेक छिल्लर द्वारा की गई। जांच के दौरान 15 जनवरी को गांव हमीरपुर, जिला अलवर से संदिग्ध बिजेंद्र सिंह को गिरफ्तार किया गया। आरोपी के बैंक खाते में 2 लाख 10 हजार रुपये की फ्रॉड राशि पाई गई है। डीसीपी क्राइम ने आगे बताया कि मामले में अन्य संदिग्धों की भूमिका भी सामने आई है। गिरफ्तार आरोपी को आज माननीय अदालत में पेश कर 3 दिन के पुलिस रिमांड पर लिया गया है, ताकि ठगी की रकम की बरामदगी, नेटवर्क की कड़ियों और सह-आरोपियों की पहचान की जा सके। शेष आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए हरियाणा सहित अन्य राज्यों में लगातार छापेमारी की जा रही है। डीसीपी क्राइम मनप्रीत सिंह सूदन का बयान:“साइबर अपराधी फर्जी अधिकारी बनकर समन, अरेस्ट वारंट और वीडियो कॉल के जरिए लोगों को डराते हैं। कोई भी सरकारी एजेंसी फोन या वीडियो कॉल पर बैंक विवरण, ओटीपी या स्क्रीन शेयरिंग की मांग नहीं करती। नागरिक ऐसे कॉल्स से सतर्क रहें, किसी भी दबाव में आकर जानकारी साझा न करें और तुरंत नजदीकी पुलिस थाना या साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराएं।”