राज्य के सामाजिक ताने-बाने को बनाए रखने और सही एवं जिम्मेदार कंटेंट के प्रसारण को सुनिश्चित करने की दिशा में सक्रिय कदम उठाते हुए भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने ज़ी5 ओटीटी प्लेटफॉर्म को एक एडवाइजरी जारी कर “लॉरेंस ऑफ पंजाब” शीर्षक वाली डॉक्यूमेंट्री (दस्तावेजी सीरीज़) रिलीज़ न करने के निर्देश दिए हैं। यह जानकारी आज यहां पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) पंजाब गौरव यादव ने दी।
यह कार्रवाई विशेष डीजीपी साइबर क्राइम वी. नीरजा द्वारा सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के समक्ष सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम की धारा 69ए(1) के तहत कंटेंट की स्क्रीनिंग पर रोक लगाने की मांग उठाए जाने के बाद सामने आई है। इसमें जन व्यवस्था पर इसके प्रभाव को लेकर गंभीर चिंताओं का हवाला दिया गया था।
डीजीपी गौरव यादव ने कहा कि विभिन्न आंतरिक जानकारियों के अनुसार इस डॉक्यूमेंट्री में शामिल नाटकीय चित्रण, वास्तविक जीवन फुटेज और विशिष्ट विवरण संगठित अपराध तथा खतरनाक अपराधियों को महिमामंडित करने का बड़ा जोखिम पैदा कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे चित्रण युवाओं को गुमराह कर सकते हैं और राज्य में कठिन प्रयासों से कायम की गई शांति तथा कानून-व्यवस्था को भंग कर सकते हैं।
इन रिपोर्टों पर तेजी से कार्रवाई करते हुए पंजाब पुलिस ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से संपर्क किया, जो भारत में ओटीटी सामग्री के लिए नामित नोडल एजेंसी है।
डीजीपी ने कहा कि पूरी सामग्री की गहन जांच के बाद मंत्रालय ने मामले पर सहमति जताते हुए ज़ी5 को एडवाइजरी जारी कर अपने ओटीटी प्लेटफॉर्म पर यह कंटेंट जारी न करने के निर्देश दिए हैं।
डीजीपी गौरव यादव ने कहा कि हम जिम्मेदार सामग्री के प्रसार को सुनिश्चित करने और राज्य के सामाजिक ताने-बाने को बनाए रखने के लिए त्वरित हस्तक्षेप करने पर भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय का धन्यवाद करते हैं।
पंजाब पुलिस के रुख की पुष्टि करते हुए डीजीपी ने कहा कि पंजाब पुलिस हर कीमत पर शांति, जन व्यवस्था, कानून-व्यवस्था और सामाजिक सद्भाव बनाए रखने के लिए वचनबद्ध है। उन्होंने चेतावनी दी कि आपराधिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की कोशिश करने वाली किसी भी सामग्री से कानून के अनुसार सख्ती से निपटा जाएगा।