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हरमिलाप नगर फेस-3 इन दिनों एक गंभीर जनस्वास्थ्य संकट से जूझ रहा है। पिछले एक सप्ताह से इलाके में पीने के पानी में सीवरेज का पानी मिलकर सप्लाई हो रहा है, जिससे हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। गंदा, बदबूदार और मटमैला पानी घरों तक पहुंच रहा है, जिसे मजबूरी में इस्तेमाल करने से लोगों की सेहत पर बुरा असर पड़ रहा है। स्थानीय निवासियों के अनुसार, इस दूषित पानी के कारण बच्चों में फूड पॉइजनिंग के मामले सामने आ रहे हैं, जबकि महिलाएं और बुजुर्ग भी पेट संबंधी बीमारियों से ग्रस्त हो चुके हैं। प्रताप सिंह राणा, जसवीर सिंह, त्रिभुवन, राजकुमार, श्याम सिंह, संतोष, मीना, उषा देवी, पिंकी, शीला और तनु ने बताया कि स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि गली के लगभग हर घर में कोई न कोई बीमार है। लोग दवाइयों के सहारे काम चला रहे हैं, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पा रहा। निवासियों का कहना है कि इस संबंध में कई बार नगर परिषद को शिकायत दी जा चुकी है, लेकिन अब तक न तो कोई अधिकारी मौके पर पहुंचा और न ही पाइपलाइन की जांच कर समस्या को दूर करने का प्रयास किया गया। इससे लोगों में प्रशासन के खिलाफ भारी रोष है। उनका आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारी पूरी तरह से लापरवाह बने हुए हैं और लोगों को साफ पीने का पानी जैसी बुनियादी सुविधा भी उपलब्ध नहीं करवा पा रहे। मौके पर मौजूद समाजसेवी प्रताप राणा, जसबीर सिंह, त्रिभुवन और राजकुमार सहित अन्य स्थानीय लोगों ने प्रशासन के प्रति कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही समस्या का समाधान नहीं किया गया तो वे सड़क पर उतरकर प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे। इस संबंध में नगर परिषद जीरकपुर के कार्यकारी अधिकारी का पक्ष जानने के लिए संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया। “फोन तक नहीं उठाते अफसर, आखिर जिम्मेदारी किसकी?” समाजसेवी प्रताप राणा ने आरोप लगाया कि जेई से लेकर कार्यकारी अधिकारी तक किसी ने फोन उठाना जरूरी नहीं समझा। उन्होंने सवाल उठाया कि जब अधिकारी जनता की समस्याएं सुनने और समाधान करने को तैयार ही नहीं हैं, तो वे अपने पद पर क्यों बने हुए हैं। उन्होंने कहा कि यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि लोगों की सेहत के साथ सीधा खिलवाड़ है, जिसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।