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न नाके दिखते हैं, न फील्ड में गश्त — लुधियाना में कानून-व्यवस्था पर सवाल लुधियाना, 29 दिसंबर | दिनेश मौदगिल औद्योगिक नगरी लुधियाना में अपराध का ग्राफ लगातार ऊपर चढ़ता जा रहा है। सरेआम लूटपाट, चोरी, मारपीट और गैंगस्टर गतिविधियों ने शहरवासियों में डर का माहौल बना दिया है। हालात ऐसे बनते जा रहे हैं कि अपराध जगत पर पुलिस का खौफ लगभग खत्म सा हो चुका है। शहर में न तो चौकों पर पर्याप्त पुलिस नाके नजर आते हैं और न ही फील्ड में नियमित गश्त। पुलिस प्रशासन किसी घटना के बाद कार्रवाई करते हुए प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपनी सफलता गिनाता जरूर है, लेकिन सवाल यह है कि रोजाना घटनाएं आखिर हो क्यों रही हैं। यदि पुलिस समय रहते चौकसी बरते, तो अपराधों में बड़ी गिरावट संभव है। पीसीआर की सक्रियता पर भी सवाल कभी शहर के हर इलाके में मुस्तैद दिखने वाली पीसीआर अब केवल औपचारिकता निभाती नजर आती है। कुछ इलाकों में तो पीसीआर की मौजूदगी नाममात्र की रह गई है, जिससे अपराधियों के हौसले और बढ़े हैं। फील्ड से गायब पुलिस पहले चौकों पर पुलिस नाके और सुरक्षा कर्मियों की मौजूदगी से असामाजिक तत्वों में डर बना रहता था, लेकिन अब नाके लगभग नदारद हैं। इसी का नतीजा है कि लूट और गुंडागर्दी की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। थानों में स्टाफ की भारी कमी सूत्रों के अनुसार, आबादी के अनुपात में पुलिस बल बेहद कम है। वीआईपी ड्यूटी में अधिकतर पुलिसकर्मी व्यस्त रहते हैं, जबकि आम जनता को थानों में घंटों इंतजार करना पड़ता है। जनता बनाम नेताओं की सुरक्षा शहर में चर्चा है कि नेताओं की सुरक्षा को आम जनता से अधिक प्राथमिकता दी जा रही है। हर विधायक और नेता के साथ सुरक्षा गाड़ियां तैनात हैं, जबकि थानों में एक पुलिसकर्मी पर सैकड़ों नागरिकों की जिम्मेदारी है। भर्ती की सख्त जरूरत विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में बड़ी संख्या में पुलिस कर्मियों की सेवानिवृत्ति होने वाली है। ऐसे में सरकार को तत्काल और निरंतर पुलिस भर्ती प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए, ताकि जनता की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। जनता की मांग है — दिखावटी कार्रवाई नहीं, जमीनी स्तर पर मजबूत पुलिसिंग।