लुधियाना/यूटर्न/9 मार्च। लुधियाना कारपोरेशन का जोन-ए अवैध इमारतें बनाने के मामले में बाकी तीन जोन से सबसे आगे निकलता जा रहा है। हालात यह हैं कि पहले बिल्डिंग ब्रांच द्वारा मिलीभगत के बाद पहले पुरानी कोतवाली एरिया में डेढ़ मंजिल पास करवा बेसमेंट समेत छह मंजिल इमारत बनवा डाली, जिसके बाद चांद सिनेमा रोड पर मरवाहा मैन्स वेयर की डेढ़ मंजिल पास करके चार मंजिलां बनवा दी गई। वहीं अब भदौड़ हाउस इलाके में ढ़ाई मंजिल बन सकते एससीएफ (शॉप कम फ्लैट) की आपसी सेटिंग के बाद पांच मंजिल की इमारत खड़ी कर दी गई। चर्चा है कि उक्त पांच मंजिल की न तो मालिक के पास एनओसी और न ही नक्शा है। नियमों के मुताबिक यह कंपाउंड भी नहीं हो सकती। चर्चाएं हैं कि इस इमारत के लिए निगम अफसरों और लीडरों को मोटी रिश्वत दी गई है। हालांकि पहले इस अवैध बिल्डिंग का शोर पड़ने पर दिखावे के लिए निगम अफसरों द्वारा निर्माण कार्य रुकवा दिया गया था। लेकिन अब अंदरखाते दोबारा से काम शुरु करवा दिया गया। जिसके चलते बिल्डिंग के ज्यादातर हिस्से का निर्माण पूरा भी कर लिया गया है। पूर्व कमिश्नर आदित्य डेचलवाल के कार्यकाल के दौरान यह मामला काफी विवादों में रहा। तब काम रोका गया और फिर शुरु करवा दिया गया। अब देखना होगा कि मौजूदा निगम कमिश्नर नीरू कत्याल मामले में क्या एक्शन ले पातीं है या नहीं।
ट्रस्ट ने बनाए थे एससीएफ
जानकारी के अनुसार लुधियाना इंप्रूवमेंट ट्रस्ट द्वारा भदौड़ हाउस इलाके में एससीओ (शॉप कम ऑफिस) व एससीएफ (शॉप कम फ्लैट) बनाकर बेचे थे। उक्त पांच मंजिलां इमारत की जमीन भी एससीएफ है। ट्रस्ट के नियमों के मुताबिक एससीएफ ग्राउंड फ्लौर समेत ढ़ाई मंजिल बनाया जा सकता है। उससे ऊपर इसका निर्माण अवैध है। उक्त जमीन की मालकी ट्रस्ट के पास है, लेकिन बाद में इसे रखरखाव के लिए निगम को हैंडऑवर कर दिया गया।
ट्रस्ट से एनओसी व निगम से नक्शा पास कराना जरुरी
नियमों के मुताबिक अगर किसी के पास पहले से ढ़ाई मंजिल एससीएफ बने हुए हैं, तो उसे नई एनओसी लेने की जरुरत नहीं। अगर कोई व्यक्ति एससीएफ को तोड़कर दोबारा निर्माण करता है, तो उसके लिए ट्रस्ट से ढ़ाई मंजिल की एनओसी लेना जरुरी है, उसी एनओसी को देखकर निगम द्वारा नक्शा पास किया जाएगा।
न एनओसी, न नक्शा और पांच मंजिलां इमारत खड़ी कर दी
एक तरफ जहां लोकल बॉडी के कड़े नियम हैं। वहीं दूसरी तरफ बिल्डिंग मालिक ने बिना एनओसी और नक्शे के सीधा पांच मंजिलां इमारत खड़ी कर डाली। चर्चाएं हैं कि इस मामले में कई लीडरों और अधिकारियों की मालिक को शह है। जिसके चलते सरेआम नियमों का उल्लंघन किया गया। शह के चलते ही आज तक अधिकारी बिल्डिंग पर पीला पंजा नहीं चला सके।
आखिर जोन-ए का कौन सा अधिकारी, जो बना रहा अवैध इमारतें
जोन-ए में धड़ल्ले से अवैध इमारतें बन रही है। लेकिन जब इस संबंधी अधिकारियों से पूछा जाए तो वह पहले तो सीधा ही उन्हें जानकारी न होने की बात कहकर इंकार कर देते हैं। अगर पता हो तो एडिशनल कमिश्नर हो या जोनल कमिश्नर वह इस मिलीभगत में उनकी शमुलियत न होने की बात कहते हैं। बिल्डिंग ब्रांच के एटीपी या इंस्पेक्टर को पूछा जाए तो वह भी इंकार कर देते हैं। ऐसे में सवाल यह खड़े हो रहे हैं कि आखिर अगर सभी अधिकारी क्लीनचिट है तो यह इमारतें किस अधिकारी की शह पर बन रही है। इसकी कमिश्नर को जरुर जांच करनी चाहिए।
निगम ऑफिस से चंद कदम दूर, फिर भी नहीं चला पीला पंजा
बता दें कि भदौड़ हाउस निगम जोन-ए से चंद कदम दूर है। लेकिन फिर भी एक महीने से निगम अधिकारी उक्त बिल्डिंग का अवैध निर्माण गिराने के लिए यह चंद कदमों की दूरी तय नहीं कर पाए। एटीपी गुरविंदर पाल सिंह लक्की द्वारा बेशक अवैध निर्माण रुकवाने की बात कही जाती है, लेकिन जो निर्माण हुआ है, उसे गिराने संबंधी कोई जवाब नहीं दिया जाता। दूसरी तरफ इस अवैध इमारत के बाद दो नेशनल अखबारों के ऑफिस है। लेकिन उनकी भी नजर इस अवैध इमारत पर नहीं पड़ी।
शिकायत आने पर निर्माण रुकवाया गया
एटीपी गुरविंदर पाल सिंह लक्की का कहना है कि उन्हें मामले की शिकायत आई थी। जिसके बाद निर्माण रुकवा दिया गया था। मेरी ट्रांसफर हो चुकी है। जिसके चलते जोन-ए के नए एटीपी कपिल देव हैं।
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